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आप यूं ही अगर हमसे मिलते रहें….देखिये आपको भी 'ओल्ड इस गोल्ड' से प्यार हो जायेगा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 324/2010/24

‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर इन दिनों आप सुन रहे हैं इंदु जी के पसंद के गीतों को। कुल पाँच में से तीन गानें हम पिछले तीन कड़ियों में सुन चुके हैं। आज है चौथे गीत की बारी। मोहम्मद रफ़ी और आशा भोसले की आवाज़ों में यह है फ़िल्म ‘एक मुसाफ़िर एक हसीना’ का एक बड़ा ही ज़बरदस्त और सुपरहिट डुएट “आप युं ही अगर हमसे मिलते रहे, देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा”। “मस्त, प्यारा सा खूबसूरत गीत जिस के बिना कोई पिकनिक, कोई प्रोग्राम पूरा नही होता। साधना की मासूमियत भरा सौन्दर्य, प्यार के इजहार का खूबसूरत अंदाज, मधुर संगीत, सब ने मिल कर एक ऐसा गीत दिया है जिसे आप किसी भी कार्यक्रम में गा कर समा बांध सकते हैं और इंदु पुरी का मतलब ही…समा बंध जाना, महफिल की जान।” बहुत सही कहा इंदु जी, आपने। आप के पसंद पर यह गीत आज इस महफ़िल में ऐसा समा बांधेगा कि लोग कह उठेंगे कि भई वाह! क्या पसंद है! साधना और जॊय मुखर्जी पर फ़िल्माया यह गीत कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों में पिक्चराइज़ हुआ था। इस फ़िल्म की चर्चा तो हम पहले कर चुके हैं इस महफ़िल में, तो क्यों ना आज इस गीत के संगीतकार ओ. पी. नय्यर साहब की कुछ बातें कर ली जाए! क्योंकि आज का गीत बड़ा रोमांटिक सा है, और नय्यर साहब के खयालात भी उतने ही रोमांटिक थे, तो क्यों ना आज इसी गीत के बहाने उनके शख्सियत के उस पक्ष को थोड़ा जानने की कोशिश करें जो उन्होने विविध भारती पर ‘दास्तान-ए-नय्यर’ शृंखला में अहमद वसी, कमल शर्मा और यूनुस ख़ान को कहे थे।

अहमद वसी: वक़्त चलता हुआ, चलता हुआ, कभी ना कभी आपको इस उमर पे लाता होगा जहाँ यह गुज़रा हुआ ज़माना जो है, ये गरदिशें जो हैं, ये अक्सर परछाइयाँ बन के चलती रहती हैं। तो क्या आप समझते हैं कि जो वक़्त गुज़रा वो बड़ा सुनहरा वक़्त था?

ओ. पी. नय्यर: वसी साहब, एक तो मैंने आप से अर्ज़ की कि मेरी ज़िंदगी का ‘aim and inspiration have been an woman’. अगर उसके अंदर ७०% स्वीट मिली है तो बाक़ी के ३०% अगर मिर्ची भी लगी है तो ३०% मिर्ची में क्यों चिल्लाते हो बेटा, ‘you have enjoyed your life, I have loved you, what else do you want’

यूनुस ख़ान: नय्यर साहब, जब आपकी युवावस्था के दिन थे, जब आप कुछ करना चाह रहे थे, तो आपके अंदर का एक अकेलापन ज़रूर रहा होगा आपकी जवानी के दिनों में।

नय्यर: मैं बार बार कई दफ़ा बता चुका हूँ कि मैं सड़कों पे अकेला रोया करता था ‘alone in the nights and for no reason’। एक दफ़ा तो हमको मार पड़ी, मैंने बोला हम आपके बेटे ही नहीं हैं, मेरे माँ बाप तो कोई और हैं। बहुत पिटाई हुई, ‘But they could not understand the loneliness in me’। हमने धोखा खाया तो पुरुषों से खाया है, औरतों ने धोखा नही दिया है। मेरी ज़िंदगी में कई औरतें रहीं जिनके साथ बड़ा मेरा दिल खोल के बात होती थी, और वो ‘this was about when I was 19 years old’। लाहोर में। मैंने उसको २१.५ बरस तक छोड़ा। बड़े हसीन दिन थे वो, क्योंकि एक तो मुझे लाहोर शहर पसंद था, और मेरी जो ‘romantic life’ शुरु हुई वो लाहोर से हुई।

कमल शर्मा: आपकी जो शादी थी वो अरेन्ज्ड थी या…

नय्यर: ‘that was a love marriage’।

यूनुस: नय्यर साहब, बात लाहोर की चल रही थी, आप ने कहा आपकी ‘romantic life’ वहाँ से शुरु हुई, किस तरह से आप मिलते थे और किस तरह से अपनी बातें करते थे?

नय्यर: यूनुस साहब, पब्लिक में थोड़े मिलेंगे! हम तो कोना ढ़ूंढते थे कि अलग जगह बैठ के बातें करने का मौका मिले। या उसी लड़की के घर ही चले जाते थे।

यूनुस: आप ने कभी किसी को प्रेम पत्र लिखा?

नय्यर: कमाल है कि मेरे पास चिट्ठियाँ रहीं, पर मैं चिट्ठियाँ लिखने के लिए ‘I feel bored’. जो कुछ कहना था अपने ज़बान से कह दिया जी।

दोस्तों, बिल्कुल इसी गीत की तरह कि जो कुछ कहना था ज़बान से ही कह दिया कि “आप युं ही अगर हमसे मिलते रहे, देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा”। पेश-ए-ख़िदमत है आशा-रफ़ी की आवाज़ों में राजा मेहंदी अली ख़ान की गीत रचना।

चलिए अब बूझिये ये पहेली, और हमें बताईये कि कौन सा है ओल्ड इस गोल्ड का अगला गीत. हम रोज आपको देंगें ४ पंक्तियाँ और हर पंक्ति में कोई एक शब्द होगा जो होगा आपका सूत्र. यानी कुल चार शब्द आपको मिलेंगें जो अगले गीत के किसी एक अंतरे में इस्तेमाल हुए होंगें, जो शब्द बोल्ड दिख रहे हैं वो आपके सूत्र हैं बाकी शब्द बची हुई पंक्तियों में से चुनकर आपने पहेली सुलझानी है, और बूझना है वो अगला गीत. तो लीजिए ये रही आज की पंक्तियाँ-

कितनी हसीं है ये दुनिया,
तेरा कूचा नहीं ये जन्नत है,
ये गली जो तेरे दर से आ रही है,
यहीं मिट जाऊं सादगी में,यही आरज़ू है …

अतिरिक्त सूत्र -रफ़ी साहब की मधुर रूमानी आवाज़ में है ये गीत

पिछली पहेली का परिणाम-
हा हा हा …कल कुछ व्यस्तता के चलते सूत्र गढना समय से नहीं हो पाया…खैर शरद जी आपने एकदम सही गीत चुना, बधाई २ अंकों के लिए…

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी
पहेली रचना –सजीव सारथी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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