Tag : vishwa deepak tanha

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अखियाँ नु चैन न आवे….नुसरत बाबा का रूहानी अंदाज़ आज ‘कहकशाँ’ में

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कहकशाँ – 8 नुसरत फ़तेह अली ख़ाँ और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें  “अब तो आजा कि आँखें उदास बैठी हैं…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी...
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बाल मन की कवितायेँ -चाक से बच्चों की जुबान पर

Sajeev
शब्दों की चाक पर – एपिसोड 09 शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को...
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परिवर्तन – एक बोझ या सहज चलन जीवन का

Sajeev
शब्दों की चाक पर – एपिसोड 08 शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को...
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10 गज़लों गीतों के माध्यम से याद करें महान मेहदी हसन साहब को

Sajeev
तालियों की गडगडाहट से गूँजता सभागार और सुरों को अपने तान में समेटती मेहदी हसन साहब की आवाज़. दोस्तों शायद अब ये समां कभी किसी...
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ख्वाब क्यों ???…कविताओं में जवाब तलाशता एक सवाल

Sajeev
शब्दों की चाक पर – एपिसोड 07 शब्दों की चाक पर हमारे कवि मित्रों के लिए हर हफ्ते होती है एक नयी चुनौती, रचनात्मकता को...
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गुरूदेव की "नौका डूबी" को "कशमकश" में तब्दील करके लाए हैं संजॉय-राजा..शब्दों का साथ दिया है गुलज़ार ने

Amit
Taaza Sur Taal (TST) – 15/2011 – KASHMAKASH (NAUKA DOOBI) कभी-कभार कुछ ऐसी फिल्में बन जाती हैं, कुछ ऐसे गीत तैयार हो जाते हैं, जिनके...
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भला हुआ मेरी मटकी फूटी.. ज़िन्दगी से छूटने की ख़ुशी मना रहे हैं कबीर… साथ हैं गुलज़ार और आबिदा

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सूफ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता...
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पोर-पोर गुलमोहर खिल गए..जब गुलज़ार, विशाल और सुरेश वाडकर की तिकड़ी के साथ "मेघा बरसे, साजन बरसे"

Amit
Taaza Sur Taal (TST) – 08/2011 – BARSE BARSE कुछ चीजें जितनी पुरानी हो जाएँ, उतनी ज्यादा असर करती हैं, जैसे कि पुरानी शराब। ज्यों-ज्यों...
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साहिब मेरा एक है.. अपने गुरू, अपने साई, अपने साहिब को याद कर रही है कबीर, आबिदा परवीन और गुलज़ार की तिकड़ी

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११२ नशे इकहरे ही अच्छे होते हैं। सब कहते हैं दोहरे नशे अच्छे नहीं। एक नशे पर दूसरा नशा न चढाओ, पर क्या है...
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मन लागो यार फ़क़ीरी में: कबीर की साखियों की सखी बनकर आई हैं आबिदा परवीन, अगुवाई है गुलज़ार की

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #१११ सूफ़ियों का कलाम गाते-गाते आबिदा परवीन खुद सूफ़ी हो गईं। इनकी आवाज़ अब इबादत की आवाज़ लगती है। मौला को पुकारती हैं तो...