Tag : nusrat fateh ali khan

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अँखियाँ नूं चैन न आवे…बाबा नुसरत की रूहानी आवाज़ आज महफ़िल ए कहकशां में

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशां  4 नुसरत फ़तेह अली खान दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर...
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अखियाँ नु चैन न आवे….नुसरत बाबा का रूहानी अंदाज़ आज ‘कहकशाँ’ में

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कहकशाँ – 8 नुसरत फ़तेह अली ख़ाँ और मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें  “अब तो आजा कि आँखें उदास बैठी हैं…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी...
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मेरा दिल तड़पे दिलदार बिना.. राहत साहब की दर्दीली आवाज़ में इस ग़मनशीं नज़्म का असर हज़ार गुणा हो जाता है

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #१०२ अभी कुछ महीनों से हमने अपनी महफ़िल “गज़लगो” पर केन्द्रित रखी थी.. हर महफ़िल में हम बस शब्दों के शिल्पी की हीं बातें...
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ये बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो…. महफ़िल में पहली मर्तबा "नुसरत" और "फ़ैज़" एक साथ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४६ पिछली कड़ी में जहाँ सारे जवाब परफ़ेक्ट होते-होते रह गए थे(शरद जी अपने दूसरे जवाब के साथ कड़ी संख्या जोड़ना भूल गए थे),...
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तेरी आवाज़ आ रही है अभी…. महफ़िल-ए-शाइर और "नासिर"

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #३० “महफ़िल-ए-गज़ल” के २५वें वसंत (यूँ तो वसंत साल में एक बार हीं आता है, लेकिन हम ने उसे हफ़्ते में दो बार आने...
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शहर के दुकानदारों को जावेद अख्तर की सलाह – एल्बम संगम से नुसरत साहब की आवाज़ में

Amit
बात एक एल्बम की # 07 फीचर्ड आर्टिस्ट ऑफ़ दा मंथ – नुसरत फतह अली खान और जावेद अख्तर.फीचर्ड एल्बम ऑफ़ दा मंथ – “संगम”...
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जब तेरी धुन में जिया करते थे…..महफ़िल-ए-हसरत और बाबा नुसरत

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #१४ कुछ फ़नकार ऐसे होते हैं, जिनकी ना तो कोई कृति पुरानी होती है और ना हीं कीर्ति पर कोई दाग लगता है। वह...
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वाइस ऑफ़ हेवन – कोई बोले राम-राम, कोई खुदाए……..नुसरत फ़तेह अली खान.

Amit
बात एक एल्बम की # 06 फीचर्ड आर्टिस्ट ऑफ़ दा मंथ – नुसरत फतह अली खान और जावेद अख्तर.फीचर्ड एल्बम ऑफ़ दा मंथ – “संगम”...
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आफ़रीन आफ़रीन…कौन न कह उठे नुसरत साहब की आवाज़ और जावेद साहब को बोलों को सुन…

Amit
बात एक एल्बम की # 05 फीचर्ड आर्टिस्ट ऑफ़ दा मंथ – नुसरत फतह अली खान और जावेद अख्तर.फीचर्ड एल्बम ऑफ़ दा मंथ – “संगम”...
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आबिदा और नुसरत एक साथ…महफिल-ए-ग़ज़ल में

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #०२ उनकी नज़र का दोष ना मेरे हुनर का दोष,पाने को मुझको हो चला है इश्क सरफ़रोश। इश्क वो बला है जो कब किस...