Tag : nida fazli

Dil se Singer

जब एक “मुक्कमल शायर” की तलाश कमाल अमरोही को ले आई निदा फाजली तक

Sajeev
दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर हैं, महफिले कहकशां के रूप में. पूजा अनिल...
Dil se Singer

“सदियों से दुनिया में यही तो क़िस्सा है….”, इस गीत के बनने की कहानी से श्रद्धांजलि स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली को!

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एक गीत सौ कहानियाँ – 76  ‘सदियों से दुनिया में यही तो क़िस्सा है…’  रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार...
Dil se Singer

“ये खेल होगा नहीं दुबारा…”, मरहूम निदा फ़ाज़ली को खिराज के साथ शुरुआत ’कहकशाँ’ की

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कहकशाँ – 1 मरहूम निदा फ़ाज़ली को खिराज  “ये खेल होगा नहीं दुबारा…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी दोस्तों को हमारा सलाम! दोस्तों, शेर-ओ-शायरी, नज़्मों,...
Dil se Singer

“मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों?” वाक़ई कब्बन मिर्ज़ा की आवाज़ हमारे आसपास है…

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एक गीत सौ कहानियाँ – 36  ‘तेरा हिज्र मेरा नसीब है...’ ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों,...
Dil se Singer

शब्दों में संसार – कवि और कविता

Sajeev
शब्दों में संसार – एपिसोड 02 – कवि और कविता   कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए, एक हिलोर इधर से आए,...
Dil se Singer

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं.. ताहिरा सैय्यद ने कुछ यूँ आवाज़ दी दाग़ की दीवानगी और मस्तानगी को

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९८ कोई नामो-निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना,तख़ल्लुस ‘दाग़’ है और आशिकों के दिल में रहते हैं। “कौन ऐसी तवाएफ़ थी जो ‘दाग़’...
Dil se Singer

तेरा हिज्र मेरा नसीब है… जब कब्बन मिर्ज़ा से गवाया खय्याम साहब और कमाल अमरोही ने

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 458/2010/158 ‘रज़िया सुल्तान’ कमाल अमरोही की एक महत्वाकांक्षी फ़िल्म थी, लेकिन बदक़िस्मती से फ़िल्म असफल रही। हाँ फ़िल्म के गानें...
Dil se Singer

सरकती जाये है रुख से नक़ाब .. अमीर मीनाई की दिलफ़रेब सोच को आवाज़ से निखारा जगजीत सिंह ने

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९४ वो बेदर्दी से सर काटे ‘अमीर’ और मैं कहूँ उन से, हुज़ूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता-आहिस्ता। आज की महफ़िल इसी शायर के नाम है,...
Dil se Singer

तुझे भूलने की दुआ करूँ तो दुआ में मेरी असर न हो.. बशीर और हुसैन बंधुओं ने माँगी बड़ी हीं अनोखी दुआ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९१ “जगजीत सिंह ने आठ गज़लें गाईं और उनसे एक लाख रुपए मिले, अपने जमाने में गालिब ने कभी एक लाख रुपए देखे भी...
Dil se Singer

हमने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर.. यादें गढने और चेहरे पढने में उलझे हैं रूप कुमार और जाँ निसार

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९० “जाँ निसार अख्तर साहिर लुधियानवी के घोस्ट राइटर थे।” निदा फ़ाज़ली साहब का यह कथन सुनकर आश्चर्य होता है.. घोर आश्चर्य। पता करने...