Tag : khayyam

एक गीत सौ अफ़साने

तेरा हिज्र मेरा नसीब है || Ek Geet Sau Afsane

Sajeev Sarathie
“तेरा हिज्र मेरा नसीब है, तेरा ग़म ही मेरी हयात है, मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों, तू कहीं भी हो मेरे साथ है…”...
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राग खमाज और बिलावल : SWARGOSHTHI – 494 : RAG KHAMAJ & BILAWAL

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 494 में आज  राज कपूर के विस्मृत संगीतकार – 10 : संगीतकार – खय्याम  जब राज कपूर ने फिल्म “फिर सुबह होगी” के...
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चाहा था एक शख़्स को… कहकशाँ-ए-तलबगार में आशा की गुहार

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 19 आशा भोंसले और खय्याम  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर...
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“करोगे याद तो हर बात याद आएगी…” – आज यादें बशर नवाज़ के इस ग़ज़ल की

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सभी पाठकों और श्रोताओं को ईद मुबारक एक गीत सौ कहानियाँ – 63  ‘करोगे याद तो हर बात याद आएगी…’  रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी...
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“मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों?” वाक़ई कब्बन मिर्ज़ा की आवाज़ हमारे आसपास है…

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एक गीत सौ कहानियाँ – 36  ‘तेरा हिज्र मेरा नसीब है...’ ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों,...
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काहे को ब्याही बिदेस रे सुन बाबुल मोरे…क्या लता की आवाज़ में सुना है कभी आपने ये गीत

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 481/2010/181 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के दोस्तों नमस्कार! लता मंगेशकर एक ऐसा नाम है जो किसी तारीफ़ की मोहताज नहीं। ये...
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फिर छिड़ी रात बात फूलों की……तलत अज़ीज़ और खय्याम से सुनिए इस गज़ल के बनने की कहानी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 460/2010/160 ये महकती ग़ज़लें इन दिनों आप सुन रहे हैं ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर लघु शृंखला ‘सेहरा में रात फूलों...
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तेरा हिज्र मेरा नसीब है… जब कब्बन मिर्ज़ा से गवाया खय्याम साहब और कमाल अमरोही ने

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 458/2010/158 ‘रज़िया सुल्तान’ कमाल अमरोही की एक महत्वाकांक्षी फ़िल्म थी, लेकिन बदक़िस्मती से फ़िल्म असफल रही। हाँ फ़िल्म के गानें...
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अहले दिल यूँ भी निभा लेते हैं….नक्श साहब का कलाम और लता की पुरकशिश आवाज़

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 453/2010/153 ख़य्याम साहब एक ऐसे संगीतकार रहे जिन्होने ना केवल अपने संगीत के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया, बल्कि...
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ये क्या जगह है दोस्तों…..शहरयार, खय्याम और आशा की तिकड़ी और उस पर रेखा की अदाकारी – बेमिसाल

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 452/2010/152 ‘सेहरा में रात फूलों की’ – ८० के दशक की कुछ यादगार ग़ज़लों की इस लघु शृंखला की दूसरी...