Tag : kaifi aazmii

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राग अल्हैया बिलावल : SWARGOSHTHI – 279 : RAG ALHAIYA BILAWAL

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 279 में आज मदन मोहन के गीतों में राग-दर्शन – 12 : समापन कड़ी में खुशहाली का माहौल “भोर आई गया अँधियारा सारे...
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बेगम अख्तर की ठुमरी और ग़ज़ल : SWARGOSHTHI – 241 : THUMARI & GAZAL OF BEGAM AKHTAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 241 में आज  संगीत के शिखर पर – 2 : बेगम अख्तर की ठुमरी और ग़ज़ल विदुषी बेगम अख्तर को उनकी जन्मशती वर्ष-पूर्ति...
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“महलों का राजा मिला…” – इस गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि दी रोशन साहब की पत्नी ने उन्हें

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एक गीत सौ कहानियाँ – 51   ‘महलों का राजा मिला कि रानी बेटी राज करेगी…’ ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी...
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स्वतंत्रता दिवस के इस सप्ताह में पढ़िये कुछ गीतकारों के संदेश हमारे फ़ौजी जवानों के नाम

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स्मृतियों के स्वर – 07 स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में विशेष ‘उन सरहदों की बात कभी नहीं करता जो दिलों में पैदा हो जाती हैं…’ ‘रेडियो...
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कर चले हम फ़िदा…कैफी आज़मी के इन बोलों ने चीर कर रख दिया था हर हिन्दुस्तानी कलेजा

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 724/2011/164 ‘वतन के तराने’ श्रृंखला की चौथी कड़ी में आपका स्वागत है। इस श्रृंखला की पिछली दो कड़ियों मे आप...
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धीरे धीरे मचल ए दिले बेकरार कोई आता है….सन्देश दे रही हैं नायिका को पियानो की स्वरलहरियां

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 595/2010/295 पियानो के निरंतर विकास की दास्तान पिछले चार दिनों से आप पढ़ते आये हैं ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की महफ़िल...
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धडकते दिल की तम्मना हो मेरा प्यार हो तुम….कितने कम हुए है इतने मासूम और मुकम्मल गीत

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 588/2010/288 सुरैया के गाये सुमधुर गीतों से सजी लघु शृंखला ‘तेरा ख़याल दिल से भुलाया ना जाएगा’ की आठवीं कड़ी...
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झूम झूम ढलती रात….सिहरन सी उठा जाती है लता की आवाज़ और कमाल है हेमन्त दा का संगीत संयोजन भी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 573/2010/273 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के दोस्तों, आप सभी को हमारा नमस्कार! पिछली दो कड़ियों में हमने आपको भारत के दो...
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ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं…..वीभत्स रस को क्या खूब उभरा है रफ़ी साहब ने इस दर्द भरे नगमें में

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 499/2010/199 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के दोस्तों, नमस्कार! आज है इस स्तंभ की ४९९ वीं कड़ी। नौ रसों की चर्चा में...
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हमने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर.. यादें गढने और चेहरे पढने में उलझे हैं रूप कुमार और जाँ निसार

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९० “जाँ निसार अख्तर साहिर लुधियानवी के घोस्ट राइटर थे।” निदा फ़ाज़ली साहब का यह कथन सुनकर आश्चर्य होता है.. घोर आश्चर्य। पता करने...