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एक गीत सौ अफ़साने

बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए ।। Ek Geet Sau Afsane

Sajeev Sarathie
आज की कड़ी में हम लेकर आए हैं वर्ष 1938 की चर्चित फ़िल्म ’Street Singer’ की कालजयी ठुमरी “बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाये” से...
एक गीत सौ अफ़साने

एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 03 || दुनिया में जब प्यार बरसे

Sajeev
एक गीत सौ अफ़साने की तीसरी कड़ी में आज चर्चा फिल्म “दिल्ली बेली” के लाजवाब गीत “दुनिया में जब प्यार बरसे” की  Ek Geet Sau...
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फिल्मों के आँगन में ठुमकती पारम्परिक ठुमरी – ७

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – ९६ में आज लौकिक और आध्यात्मिक भाव का बोध कराती ठुमरी ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय…’ चौथे से लेकर छठें दशक तक की...
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स्मृतियों के झरोखे से : भारतीय सिनेमा के सौ साल – 17

कृष्णमोहन
भूली-बिसरी यादें भारतीय सिनेमा के शताब्दी वर्ष में आयोजित विशेष श्रृंखला ‘स्मृतियों के झरोखे से’ के एक नये अंक के साथ मैं कृष्णमोहन मिश्र अपने...
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“बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाए” – कुंदनलाल सहगल की जयन्ती पर इस ठुमरी से संबंधित कुछ रोचक तथ्य

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कई बार कुछ उक्तियाँ लोककंठ में इस प्रकार समा जाते हैं कि कभी-कभी तो उनका आगा-पीछा ही समझ में नहीं आता, कभी उसके अर्थ का...
एक गीत सौ अफ़साने

“सैगल ब्लूज़” – सहगल साहब की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजली एक नए अंदाज़ में

cgswar
कुंदनलाल सहगल को इस दुनिया से गए आज ६५ वर्ष हो चुके हैं, पर उनकी आवाज़ आज भी सर चढ़ के बोल रहा है। फ़िल्म...
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भैरवी के सुरों में श्रृंगार, वैराग्य और आध्यात्म का अनूठा संगम -"बाबुल मोरा नैहर छुटो ही जाए.."

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 685/2011/125 ‘ओल्ड इज गोल्ड’ पर जारी श्रृंखला “रस के भरे तोरे नैन” की पाँचवी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र आपका...
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पिया बिन नाहीं आवत चैन: राग झिंझोटी के सुरों में उभरी देवदास की बेचैनी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 681/2011/121 नमस्कार! ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के सभी दोस्तों को सुजॉय चटर्जी का नमस्कार! सजीव सारथी के निर्देशन में इस सुरीले...
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एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा….सुनिए एक कहानी सहगल साहब की जुबानी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 671/2011/111 नमस्कार! ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की एक नई सप्ताह के साथ मैं, सुजॉय चटर्जी, साथी सजीव सारथी के साथ आप...
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मोहब्बत में कभी ऐसी भी हालत पायी जाती है…..और मोहब्बत के भेद बताते बताते यूं हीं एक दिन अचानक सहगल साहब अलविदा कह गए

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 630/2010/330 सुर-सम्राट कुंदन लाल सहगल को समर्पित ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की लघु शृंखला ‘मधुकर श्याम हमारे चोर’ की अंतिम कड़ी...