Tag : jagjit singh

एक मुलाक़ात ज़रूरी है

जगजीत सिंह जी मेरा सीखना आज भी ज़ारी है || Tauseef Akhtar || Ghazal Singer and Composer || Sajeev Sarathie

Sajeev
  एक मुलाकात जरूरी है के 29 वें एपिसोड में आज मिलिये मशहूर ग़ज़ल गायक तौसीफ अख्तर साहब से, जो जगजीत सिंह जी के शागिर्द...
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तुम बोलो कुछ तो बात बने….जगजीत-चित्रा की दिली ख़्वाहिश आज ’कहकशाँ’ में

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कहकशाँ – 12 जगजीत-चित्रा की दिली ख़्वाहिश  “आइये चराग़-ए-दिल आज ही जलाएँ हम…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी दोस्तों को हमारा सलाम! दोस्तों, शेर-ओ-शायरी, नज़्मों,...
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आज की महफ़िल में सुनिये क्या कहते हैं गुलज़ार साहब त्रिवेणियों के बारे में!

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशां 6 दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर हैं, “महफिल ए कहकशां” के...
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जगजीत सिंह और राग : SWARGOSHTHI – 242 : JAGJEET SINGH AND RAGAS

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 242 में आज संगीत के शिखर पर – 3 : जगजीत सिंह के गजल, गीत और भजन जगजीत सिंह के बेमिसाल मगर कमचर्चित...
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एक आवाज़ जिसने गज़ल को दिए नए मायने

Sajeev
मखमली आवाज़ की रूहानी महक और ग़ज़ल के बादशाह जगजीत सिंह को हमसे विदा हुए लगभग २ साल बीत चुके हैं, बीती १० तारिख को...
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“वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी” – हर कोई अपना बचपन देखता है इस नज़्म में

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कुछ गीत, कुछ ग़ज़लें, कुछ नज़्में ऐसी होती हैं जो हमारी ज़िन्दगियों से, हमारी बचपन की यादों से इस तरह से जुड़ी होती हैं कि...
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हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँद… राही मासूम रज़ा, जगजीत-चित्रा एवं आबिदा परवीन के साथ

विश्व दीपक
“मेरे बिना किस हाल में होगा, कैसा होगा चाँद” – बस इस पंक्ति से हीं राही साहब ने अपने चाँद के दु:ख का पारावार खड़...
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कहाँ तुम चले गए …बस यही दोहराते रह गए जगजीत के दीवाने

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 780/2011/220 जगजीत सिंह को समर्पित ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की लघु शृंखला ‘जहाँ तुम चले गए’ की अंतिम कड़ी में आप...
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ये तेरा घर ये मेरा घर….आम आदमी की संकल्पनाओं को शब्द दिए जावेद अख्तर ने

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 779/2011/219 जगजीत सिंह को समर्पित ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की लघु शृंखला ‘जहाँ तुम चले गए’ में एक बार फिर से...
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बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए…पारंपरिक बोलों पर जगजीत चित्रा के स्वरों की महक

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 778/2011/218 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के सभी श्रोता-पाठकों का स्वागत है इस स्तंभ में जारी शृंखला ‘जहाँ तुम चले गए’ की...