Tag : gulzar

एक गीत सौ अफ़साने

Mere to Giridhar Gopal | Ek Geet Sau Afsane

Sajeev Sarathie
“मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो ना कोय…” – आज फ़िल्म ’मीरा’ के भजन के बहाने जानिए इस फ़िल्म और फ़िल्म के गीतों के निर्माण से...
एक गीत सौ अफ़साने

एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 02 || छोटी सी कहानी से

Sajeev
 एक गीत सौ अफ़साने की दूसरी कड़ी में आज चर्चा फिल्म “इजाजत” के लाजवाब गीत “छोटी सी कहानी से” की  Ek Geet Sau Afsane explores...
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राग मीरा मल्हार : SWARGOSHTHI – 431 : RAG MIRA MALHAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 431 में आज वर्षा ऋतु के राग – 5 : मीरा मल्हार अथवा मीराबाई की मल्हार पण्डित अजय चक्रवर्ती से इस राग में...
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राग मीरा और रामदासी मल्हार : SWARGOSHTHI – 330 : RAG MIRA & RAMDASI MALHAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 330 में आज पावस ऋतु के राग – 5 : राग मीरा और रामदासी मल्हार उस्ताद अमीर खाँ से रामदासी और वाणी जयराम...
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महफ़िल ए कहकशां -23, “सातों बार बोले बंसी” जैसे नगीनों से सजी है आज की “गुलज़ार-आशा-पंचम”-मयी महफ़िल

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 23 पंचम, आशा ताई और गुलज़ार  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम...
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चित्रकथा – 5: गुलज़ार के गीतों में विरोधाभास

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अंक – 5 गुलज़ार के गीतों में विरोधाभास “एक पल रात भर नहीं गुज़रा…” ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार...
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चित्रकथा – 2: बिमल रॉय की मृत्यु की अजीबोग़रीब दास्तान

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अंक – 2 बिमल रॉय की मृत्यु की अजीबोग़रीब दास्तान “अमृत कुंभ की खोज में…” ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का...
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“सातों बार बोले बंसी” और “जाने दो मुझे जाने दो” जैसे नगीनों से सजी है आज की “गुलज़ार-आशा-पंचम”-मयी महफ़िल

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कहकशाँ – 24 गुलज़ार, पंचम और आशा ’दिल पड़ोसी है’ में   “दिल पड़ोसी है, मगर मेरा तरफ़दार नहीं…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी दोस्तों को...
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अपने पडो़सी दिल से भीनी-भीनी भोर की माँग कर बैठे गोटेदार गुलज़ार साहब, आशा जी एवं राग तोड़ी वाले पंचम दा

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कहकशाँ – 23 गुलज़ार, पंचम और आशा ’दिल पड़ोसी है’ में   “भीनी भीनी भोर आई…” ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी दोस्तों को हमारा सलाम! दोस्तों,...
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रामदासी और मीरा मल्हार : SWARGOSHTHI – 284 : RAMDASI AND MEERA MALHAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 284 में आज पावस ऋतु के राग – 5 : पण्डित रविशंकर की अनूठी रचना ‘बादल देख डरी…’ और ‘छाए बदरा कारे कारे…’...