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Dil se Singer

एक बात कहूँ गर मानो तुम…..हमेशा हँसते हंसाते रहिये इसी तरह

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 653/2011/93 गायक गायिकाओं की हँसी इन दिनों आप सुन रहे हैं ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की इस लघु शृंखला ‘गान और...
Dil se Singer

कायदा कायदा आखिर फायदा…..कभी कभी कायदों को हटाकर भी जीने का मज़ा है समझा रहीं हैं रेखा

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 639/2010/339 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के दोस्तों नमस्कार! ‘सितारों की सरगम’ शृंखला में कल आपनें शत्रुघ्न सिंहा का गाया गीत सुना...
Dil se Singer

एक बात सुनी है चाचा जी बतलाने वाली है….और सुनिए कि चाचा शत्रुघ्न ने इस बार "खामोश" नहीं कहा

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 638/2010/338 फ़िल्मी सितारों की आवाज़ें इन दिनों गूंज रही है ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की महफ़िल में, और शृंखला है ‘सितारों...
Dil se Singer

पोर-पोर गुलमोहर खिल गए..जब गुलज़ार, विशाल और सुरेश वाडकर की तिकड़ी के साथ "मेघा बरसे, साजन बरसे"

Amit
Taaza Sur Taal (TST) – 08/2011 – BARSE BARSE कुछ चीजें जितनी पुरानी हो जाएँ, उतनी ज्यादा असर करती हैं, जैसे कि पुरानी शराब। ज्यों-ज्यों...
Dil se Singer

साहिब मेरा एक है.. अपने गुरू, अपने साई, अपने साहिब को याद कर रही है कबीर, आबिदा परवीन और गुलज़ार की तिकड़ी

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११२ नशे इकहरे ही अच्छे होते हैं। सब कहते हैं दोहरे नशे अच्छे नहीं। एक नशे पर दूसरा नशा न चढाओ, पर क्या है...
Dil se Singer

मन लागो यार फ़क़ीरी में: कबीर की साखियों की सखी बनकर आई हैं आबिदा परवीन, अगुवाई है गुलज़ार की

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #१११ सूफ़ियों का कलाम गाते-गाते आबिदा परवीन खुद सूफ़ी हो गईं। इनकी आवाज़ अब इबादत की आवाज़ लगती है। मौला को पुकारती हैं तो...
Dil se Singer

हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें….विश्व कप के लिए लड़ रहे सभी प्रतिभागियों के नाम आवाज़ का पैगाम

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 601/2010/301 नमस्कार! ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ में आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है। दोस्तों, पिछले बृहस्पतिवार १७ फ़रवरी को २०११...
Dil se Singer

"सातों बार बोले बंसी" और "जाने दो मुझे जाने दो" जैसे नगीनों से सजी है आज की "गुलज़ार-आशा-पंचम"-मयी महफ़िल

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११० बाद मुद्दत के फिर मिली हो तुम,ये जो थोड़ी-सी भर गई हो तुम,ये वज़न तुम पर अच्छा लगता है.. अभी कुछ दिनों पहले...
Dil se Singer

जाने क्या सोच कर नहीं गुजरा….गुलज़ार साहब के गीतों से सजा हर लम्हा कुछ सोचता रुक जाता है हमारे जीवन में भी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 470/2010/170 ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर गुलज़ार साहब के लिखे गीतों की लघु शृंखला ‘मुसाफ़िर हूँ यारों’ की अंतिम कड़ी में...
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रोज अकेली आये, चाँद कटोरा लिए भिखारिन रात…..गुलज़ार साहब की अद्भुत कल्पना और सलिल दा के सुर

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 469/2010/169 ‘मुसाफ़िर हूँ यारों’, गुलज़ार साहब के लिखे गीतों के इस लघु शृंखला की आज नवी कड़ी है। अब तक...