Tag : gulzaar

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राग मीरा अथवा मीराबाई की मल्हार : SWARGOSHTHI – 474 : RAG MIRA OR MIRABAI KI MALHAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 474 में आज काफी थाट के राग – 18 : राग मीरा अथवा मीराबाई की मल्हार पण्डित अजय चक्रवर्ती से राग मीरा मल्हार...
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राग जयन्ती मल्हार : SWARGOSHTHI – 473 : RAG JAYANTI MALHAR

कृष्णमोहन
स्वरगोष्ठी – 473 में आज काफी थाट के राग – 17 : राग जयन्त अथवा जयन्ती मल्हार पण्डित विनायक राव पटवर्धन से राग जयन्ती मल्हार...
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महफ़िल ए कहकशां -22, अपने पडो़सी दिल से भीनी-भीनी भोर की माँग कर बैठे गोटेदार गुलज़ार साहब, आशा जी एवं राग तोड़ी वाले पंचम दा

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 22 पंचम, आशा ताई और गुलज़ार  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम...
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आज की महफ़िल में सुनिये क्या कहते हैं गुलज़ार साहब त्रिवेणियों के बारे में!

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशां 6 दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर हैं, “महफिल ए कहकशां” के...
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फिर किसी शाख ने फेंकी छाँव….और "बहुत देर तक" महकती रही तनहाईयाँ

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 719/2011/159 ‘एल्ड इज़ गोल्ड’ के सभी चाहने वालों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! जैसा कि इन दिनों इस...
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कतरा कतरा मिलती है…..खुशी और दर्द के तमाम फूलों को समेट लेता है "वो" आकर

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 717/2011/157 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ स्तंभ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय और सजीव का प्यार भरा नमस्कार! आज इस सुरीली महफ़िल...
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कोई होता मेरा अपना…..शोर के "जंगल" में कोई जानी पहचानी सदा ढूंढती जिंदगी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 715/2011/155 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की एक और शाम लेकर मैं, सुजॉय चटर्जी, साथी सजीव सारथी के साथ हाज़िर हूँ। जैसा...
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दिल ढूँढता है….रोजमर्रा की आपाधापी से भरे शहरी जीवन में सुकून भरा "अवकाश" तलाशती जिंदगी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 713/2011/153 ‘एक पल की उम्र लेकर’ – सजीव सारथी की कविताओं से सजी इस पुस्तक में से १० चुनिंदा कविताओं...
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एक दफा एक जंगल था उस जंगल में एक गीदड था….याद है कुछ इस कहानी में आगे क्या हुआ था

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 680/2011/120 किस्से-कहानियों का आनंद लेते हुए आज हम आ पहुँचे हैं ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की लघु शृंखला ‘एक था गुल...
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गुरूदेव की "नौका डूबी" को "कशमकश" में तब्दील करके लाए हैं संजॉय-राजा..शब्दों का साथ दिया है गुलज़ार ने

Amit
Taaza Sur Taal (TST) – 15/2011 – KASHMAKASH (NAUKA DOOBI) कभी-कभार कुछ ऐसी फिल्में बन जाती हैं, कुछ ऐसे गीत तैयार हो जाते हैं, जिनके...