Tag : asha bhonsale

एक गीत सौ अफ़साने

एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 02 || छोटी सी कहानी से

Sajeev
 एक गीत सौ अफ़साने की दूसरी कड़ी में आज चर्चा फिल्म “इजाजत” के लाजवाब गीत “छोटी सी कहानी से” की  Ek Geet Sau Afsane explores...
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महफ़िल ए कहकशां -23, “सातों बार बोले बंसी” जैसे नगीनों से सजी है आज की “गुलज़ार-आशा-पंचम”-मयी महफ़िल

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 23 पंचम, आशा ताई और गुलज़ार  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम...
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महफ़िल ए कहकशां -22, अपने पडो़सी दिल से भीनी-भीनी भोर की माँग कर बैठे गोटेदार गुलज़ार साहब, आशा जी एवं राग तोड़ी वाले पंचम दा

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 22 पंचम, आशा ताई और गुलज़ार  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम...
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चाहा था एक शख़्स को… कहकशाँ-ए-तलबगार में आशा की गुहार

Pooja Anil
महफ़िल ए कहकशाँ 19 आशा भोंसले और खय्याम  दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित “कहकशां” और “महफिले ग़ज़ल” का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर...
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आगे भी जाने न तू….जब बदलती है जिंदगी एक पल में रूप अनेक तो क्यों न जी लें पल पल को

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 720/2011/160 सजीव सारथी के लिखे कविता-संग्रह ‘एक पल की उम्र लेकर‘ पर आधारित ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की इसी शीर्षक से...
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अपने दिल में जगह दीजिए….गुजारिश की उषा खन्ना ने और उनके गीतों को सर आँखों पे बिठाया श्रोताओं ने

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 616/2010/316 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की इस नए सप्ताह में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इन दिनों इस स्तंभ में...
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तेरा करम ही तेरी विजय है….यही तो सार है गीता का और यही है मन्त्र जीवन के हर खेल का भी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 610/2010/310 खेलकूद और ख़ास कर क्रिकेट की चर्चा करते हुए आज हम आ पहुँचे हैं लघु शृंखला ‘खेल खेल में’...
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हु तू तू….सुनिए अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर इस कब्बडी गीत को और सलाम कीजिए खेलों में जबरदस्त प्रदर्शन दिखाने वाली भारतीय महिलाओं को

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 608/2010/308 आज है ८ मार्च, यानी कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस। इस अवसर पर हम ‘हिंद-युग्म’ के सभी महिला मित्रों को...
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एक मैं और एक तू, दोनों मिले इस तरह….ये था प्यार का नटखट अंदाज़ सत्तर के दशक का

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 558/2010/258 ‘एक मैं और एक तू’ – ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की इस लघु शृंखला की आठवीं कड़ी में आज एक...
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दुःख भरे दिन बीते रे भैया अब सुख आयो रे…..एक क्लास्सिक फिल्म का गीत जिसके निर्देशक थे महबूब खान

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 539/2010/239 महबूब ख़ान की फ़िल्मी यात्रा पर केन्द्रित इन दिनों ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ की लघु शृंखला ‘हिंदी सिनेमा के लौह...