Tag : shubha mudgal

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ओ क़ाबा-ए-दिल ढाहने वाले, बुतखाना हूँ तो तेरा हूँ…. "ज़हीन" के शब्द और "शुभा" की आवाज़

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४२ “प्रश्न-पहेली” की यह दूसरी “किश्त” पाठकों को भा रही है, इसी यकीन और इसी उम्मीद के साथ हम पहुँच गए हैं इस पहेली...
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मन के मंजीरे आज खनकने लगे

Amit
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष हिंद युग्म आवाज़ के सभी महिला श्रोताओं को अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की ढेरों शुभकामनायें. दुनिया की आधी आबादी को समर्पित...
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"केसरिया बालमा..", मांड एक – फनकार अनेक

Amit
राजस्थान के राजाओं की रूमानी कहानियों पर आधारित लोक गीत हैं जिन्हें मांड कहा जाता है. रेगिस्तान की मिटटी में रचे बसे इस राग पर...