Tag : prashn pratiyogita

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ये खेल होगा नहीं दुबारा…बड़ी हीं मासूमियत से समझा रहे हैं "निदा" और "जगजीत सिंह"

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #५० महफ़िल-ए-गज़ल की जब हमने शुरूआत की थी, तब हमने सोचा भी नहीं था कि गज़लों का यह सफ़र ५०वीं कड़ी तक पहुँचेगा। लेकिन...
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घायल जो करने आए वही चोट खा गए…….."गुमनाम" के शब्द और "रेशमा" आपा का दर्द

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४९ बड़े दिनों के बाद ऐसा हुआ कि महफ़िल में हाज़िरी लगाने के मामले में सीमा जी पिछड़ गईं और महफ़िल का मज़ा कोई...
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क्या टूटा है अन्दर अन्दर….इरशाद के बाद महफ़िल में गज़ल कही "शहज़ाद" ने…साथ हैं "खां साहब"

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४८ पिछली कड़ी में पूछे गए दो सवालों में से एक सवाल था “गुलज़ार” साहब के उस मित्र का नाम बताएँ जिसने गुलज़ार साहब...
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ये बात मैं कैसे भूल जाऊँ कि हम कभी हमसफ़र रहे हैं….."बख्शी" साहब और "अनवर" की अनोखी जुगलबंदी

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४७ अमूमन तीन या चार कड़ियों से हमारी प्रश्न-पहेली का हाल एक-सा है। तीन प्रतिभागी (नाम तो सभी जानते हैं) अपने जवाबों के साथ...
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ये बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो…. महफ़िल में पहली मर्तबा "नुसरत" और "फ़ैज़" एक साथ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४६ पिछली कड़ी में जहाँ सारे जवाब परफ़ेक्ट होते-होते रह गए थे(शरद जी अपने दूसरे जवाब के साथ कड़ी संख्या जोड़ना भूल गए थे),...
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एक कोने में गज़ल की महफ़िल, एक कोने में मैखाना हो…"गोरखपुर" के हर्फ़ों में जाम उठाई "पंकज" ने

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४५ पूरी दो कड़ियों के बाद “सीमा” जी ने अपने पहले हीं प्रयास में सही जवाब दिया है। इसलिए पहली मर्तबा वो ४ अंकों...
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आज के बाद कोई खत न लिखूँगा तुझको…. "अश्क़" के हवाले से चेता रहे हैं "चंदन दास"

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४४ अगर पिछली कड़ी की बात करें तो उस कड़ी की प्रश्न-पहेली का हमारा अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा। “सीमा” जी जवाबों के साथ...
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दीपक राग है चाहत अपनी, काहे सुनाएँ तुम्हें… "होशियारपुरी" के लफ़्ज़ों में बता रही हैं "शाहिदा"

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४३ यूँतो पिछली महफ़िल बाकी के महफ़िलों जैसी हीं थी। लेकिन “प्रश्न-पहेली” के आने के बाद और दो सवालों के जवाब देने के क्रम...
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ओ क़ाबा-ए-दिल ढाहने वाले, बुतखाना हूँ तो तेरा हूँ…. "ज़हीन" के शब्द और "शुभा" की आवाज़

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४२ “प्रश्न-पहेली” की यह दूसरी “किश्त” पाठकों को भा रही है, इसी यकीन और इसी उम्मीद के साथ हम पहुँच गए हैं इस पहेली...
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फिर तमन्ना जवां न हो जाए….. महफ़िल में पहली बार "ताहिरा" और "हफ़ीज़" एक साथ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४१ आज से फिर हम प्रश्नों का सिलसिला शुरू करने जा रहे हैं। इसलिए कमर कस लीजिए और तैयार हो जाईये अनोखी प्रतियोगिता का...