Tag : pankaj udhaas

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चिट्टी आई है वतन से….अपने वतन या घर से दूर रह रहे हर इंसान के मन को गहरे छू जाता है ये गीत

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 390/2010/90 आनंद बक्शी पर केन्द्रित लघु शृंखला ‘मैं शायर तो नहीं’ के अंतिम कड़ी पर हम आज आ पहुँचे हैं।...
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सोलह बरस की बाली उमर को सलाम….और सलाम उन शब्दों के शिल्पकार को

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 389/2010/89 ‘मैंशायर तो नहीं’ शृंखला में आनंद बक्शी साहब के लिखे गीतों का सिलसिला जारी है ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर।...
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एक कोने में गज़ल की महफ़िल, एक कोने में मैखाना हो…"गोरखपुर" के हर्फ़ों में जाम उठाई "पंकज" ने

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४५ पूरी दो कड़ियों के बाद “सीमा” जी ने अपने पहले हीं प्रयास में सही जवाब दिया है। इसलिए पहली मर्तबा वो ४ अंकों...
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एक तरफ़ उसका घर, एक तरफ़ मयकदा… .महफ़िल-ए-खास और पंकज उधास

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #१५ देश से बाहर बसे खानाबदोशों को रूलाने के लिए करीब २३ साल पहले एक शख्स ने फिल्मी संगीत की तिलिस्मी दुनिया में कदम...