Tag : noorjahan

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रोएंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताये क्यूँ.. नूरजहां की काँपती आवाज़ में मचल पड़ी ग़ालिब की ये गज़ल

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७३ लाजिम था कि देखो मेरा रस्ता कोई दिन और, तनहा गये क्यों अब रहो तनहा कोई दिन और। ग़ालिब की ज़िंदगी बड़ी हीं...
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आवाज़ दे कहाँ है…ओल्ड इस गोल्ड में पहली बार बातें गायक/अभिनेता सुरेन्द्र की

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 347/2010/47 ४० का दशक हमारे देश के इतिहास में राष्ट्रीय जागरण के दशक के रूप में याद किया जाता है।...
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दिया जलाकर आप बुझाया तेरे काम निराले…याद करें नूरजहाँ और उनकी सुरीली आवाज़ को इस गीत में

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 346/2010/46 इन दिनों ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ के अंतर्गत हम आपको ४० के दशक के हर साल का एक सुपरहिट गीत...
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दुखाए दिल जो किसी का वो आदमी क्या है.. मुज़फ़्फ़र वारसी के शब्दों के सहारे पूछ रही हैं मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #६८ पिछली दो कड़ियों से न जाने क्यों वह बात बन नहीं पा रही थी, जिसकी दरकार थी। वैसे कारण तो हमें भी पता...
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बैठी हूँ तेरी याद का लेकर के सहारा….पकिस्तान जाकर भी नूरजहाँ नहीं भूली एक पल को भी हिन्दुस्तान के प्यार को

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 209 ‘ओआज है २१ सितंबर। इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी और व्यस्ततता के बीच हम अक्सर भूल जाते हैं गुज़रे ज़माने...
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जवाँ है मोहब्बत हसीं है ज़माना…यादें है इस गीत में मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहाँ की

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 98 आज का ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ बहुत ख़ास है क्योंकि आज हम इसमे एक ऐसी आवाज़ आप तक पहुँचा रहे...