Tag : mohammad ibrahim zauk

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रोएंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताये क्यूँ.. नूरजहां की काँपती आवाज़ में मचल पड़ी ग़ालिब की ये गज़ल

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७३ लाजिम था कि देखो मेरा रस्ता कोई दिन और, तनहा गये क्यों अब रहो तनहा कोई दिन और। ग़ालिब की ज़िंदगी बड़ी हीं...
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सुनिए इब्राहीम ज़ौक का कलाम और शिशिर पारखी की आवाज़

Amit
एहतराम – अज़ीम शायरों को सलाम ( अंक – ०२ )आवाज़ मशहूर ग़ज़ल गायक शिशिर पारखी के साथ मिल कर संगीतमय स्मरण कर रहा है...