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सुनिए 'हाहाकार' और 'बालिका से वधू'

Amit
सूखी रोटी खायेगा जब कृषक खेत में धरकर हल,तब दूँगी मैं तृप्ति उसे बनकर लोटे का गंगाजल।उसके तन का दिव्य स्वेदकण बनकर गिरती जाऊँगी,और खेत...