Tag : kaifi aazmii

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हमने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर.. यादें गढने और चेहरे पढने में उलझे हैं रूप कुमार और जाँ निसार

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९० “जाँ निसार अख्तर साहिर लुधियानवी के घोस्ट राइटर थे।” निदा फ़ाज़ली साहब का यह कथन सुनकर आश्चर्य होता है.. घोर आश्चर्य। पता करने...
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जब भी चूम लेता हूँ इन हसीन आँखों को…. कैफ़ी की "कैफ़ियत" और रूप की "रूमानियत" उतर आई है इस गज़ल में..

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #८१ पि छली दस कड़ियों में हमने बिना रूके चचा ग़ालिब की हीं बातें की। हमारे लिए वह सफ़र बड़ा हीं सुकूनदायक रहा और...
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पीतल की मेरी गागरी….लोक संगीत और गाँव की मिटटी की महक से चहकता एक 'सखी सहेली' गीत

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 399/2010/99 कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जिनमें इस मिट्टी की महक मौजूद होती हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसी...
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कोई ये कैसे बताये कि वो तन्हा क्यों है….कैफी साहब और जगजीत सिंह जैसे चीर देते है दिल

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 379/2010/79 कल हमने १९८२ की फ़िल्म ‘बाज़ार’ का ज़िक्र किया था। आज भी हम १९८२ पर ही कायम हैं और...
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और कुछ देर ठहर, और कुछ देर न जा…कहते रह गए चाहने वाले मगर कैफी साहब नहीं रुके

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 315/2010/15 हमारे देश में ऐसे कई तरक्की पसंद अज़ीम शायर जन्में हैं जिन्होने आज़ादी के बाद एक सांस्कृतिक व सामाजिक...
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रविवार सुबह की कॉफ़ी और कुछ दुर्लभ गीत (२२)

Sajeev
कुछ फ़िल्में अपने गीत-संगीत के लिए हमेशा याद की जाती है. कुछ फ़िल्में अपनी कहानी को ही बेहद काव्यात्मक रूप से पेश करती है, जैसे...
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जाने क्या ढूंढती रही है ये ऑंखें मुझमें…ढूंढते हैं हम संगीत प्रेमी आज भी उस आवाज़ को जो कहीं आस पास ही है हमेशा

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 157 ‘दस चेहरे एक आवाज़ – मोहम्मद रफ़ी’, आवाज़ पर इन दिनों आप सुन रहे हैं गायक मोहम्मद रफ़ी को...
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आज की काली घटा…याद कर रही है उस आवाज़ को जो कहीं दूर होकर भी पास है

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 147 सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका गीता दत्त जी के आख़िर के दिनों की दुखभरी कहानी का ज़िक्र हमनें यहाँ कई बार...
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मेरी आवाज़ सुनो, प्यार का राग सुनो…..स्वर्गीय मदन साहब के गीत बोले रफी के स्वरों में ढल कर

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 140 सन् १९२४ में इराक़ के बग़दाद में जन्मे मदन मोहन कोहली को द्वितीय विश्व युद्ध के समय फ़ौजी बनकर...
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मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था…रफी साहब के गाये बहतरीन नज्मों में से एक

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 137 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ में इन दिनों हम उस सुर साधक की बातें कर रहे हैं जिनका अंदाज़ था सब...