Tag : golden era of urdu poetry

Uncategorized

सरकती जाये है रुख से नक़ाब .. अमीर मीनाई की दिलफ़रेब सोच को आवाज़ से निखारा जगजीत सिंह ने

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #९४ वो बेदर्दी से सर काटे ‘अमीर’ और मैं कहूँ उन से, हुज़ूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता-आहिस्ता। आज की महफ़िल इसी शायर के नाम है,...
Uncategorized

एहतराम की अंतिम कड़ी- मीर तकी 'मीर' की ग़ज़ल

Amit
एहतराम – अजीम शायरों को सलाम इस श्रृंखला में अब तक हम ६ उस्ताद शायरों का एहतराम कर चुके हैं. आज पेश है शिशिर पारखी...
Uncategorized

वो मिजाज़ से बादशाह कम शायर ज्यादा था…उस्ताद शायर बहादुर शाह ज़फ़र को सलाम – शिशिर पारखी

Amit
एहतराम – अजीम शायरों को सलाम ( अंक – ०५ )इश्क में क्या क्या मेरे जुनूँ की…. सुनिए ज़फ़र का कलाम शिशिर की आवाज़ में...