Tag : begum akhtar

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मुझे अपने ज़ब्त पे नाज़ था.. इक़बाल अज़ीम के बोल और नय्यारा नूर की आवाज़.. फिर क्यूँकर रंज कि बुरा हुआ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #६९ इंसानी मन प्रशंसा का भूखा होता है। भले हीं उसे लाख ओहदे हासिल हो जाएँ, करोड़ों का खजाना हाथ लग जाए, फिर भी...
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जां अपनी, जांनशीं अपनी तो फिर फ़िक्र-ए-जहां क्यों हो…बेगम अख्तर और आशा ताई एक साथ.

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #०३ ग़मे-हस्ती, ग़मे-बस्ती, ग़मे-रोजगार हूँ,ग़म की जमीं पर गुमशुदा एक शह्रयार हूँ। बात इतनी-सी है कि दिन जलाने के लिए सूरज को जलना हीं...
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दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे…. बेगम अख्तर

Amit
(पहले अंक से आगे..)अख्तर बेगम जितनी अच्छी फ़नकार थीं उतनी ही खूबसूरत भी थीं। कई राजे महाराजे उनका साथ पाने के लिए उनके आगे पीछे...