Tag : bade gulam ali khan

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ख़ाक हो जायेंगे हम तुम को ख़बर होने तक.. उस्ताद बरकत अली खान की आवाज़ में इश्क की इन्तहा बताई ग़ालिब ने

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७४ इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी-ए-कामिल को,तब जाके कहीं हम को ग़ालिब का ख़्याल आया ।तुर्बत है कहाँ उसकी, मसकन था कहाँ उसका,अब अपने सुख़न...
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खुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला…..गुलाम अली की मार्फ़त पूछ रहे हैं आनंद बख्शी

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #३७ दिशा जी की पसंद की दूसरी गज़ल लेकर आज हाज़िर हैं हम। आज के अंक में जो गज़ल हम आप सबको सुनवाने जा...
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स्वर और सुर की देवी – एम एस सुब्बलक्ष्मी

Amit
“जब एक बार हम अपनी कला और भक्ति से भीतर की दिव्यता से सामंजस्य बिठा लेते हैं, तब हम इस शरीर के बाहर भी प्रेम...