Tag : Shailendra

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कैसे दिन बीते कैसे बीती रतिया….पंडित रवि शंकर और शैलेन्द्र की जुगलबंदी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 299 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर इन दिनों आप सुन रहे हैं शरद तैलंग जी के पसंद के पाँच गानें बिल्कुल...
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दिल की नज़र से, नज़रों की दिल से….कुछ बातें लता-मुकेश के स्वरों में

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ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 296 शरद तैलंग जी के पसंद पर आज एक बड़ा ही ख़ूबसूरत सा रोमांटिक नग़मा। ५० के दशक में राज...
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सजनवा बैरी हो गए हमार….शैलेन्द्र का दर्द पी गयी मुकेश की आवाज़, और चेहरा था राज कपूर का

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ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 290 दोस्तों, यह शृंखला जो इन दिनों आप सुन रहे हैं वह है “शैलेन्द्र- आर.के.फ़िल्म्स के इतर भी”। यानी कि...
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वहां कौन है तेरा, मुसाफिर जायेगा कहाँ….और "राम राम" कहा गया वो मुसाफिर कवि शैलेन्द्र

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 289 शृंखला “शैलेन्द्र- आर.के.फ़िल्म्स के इतर भी” में आज एक बार फिर से हम रुख़ कर रहे हैं शैलेन्द्र के...
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ओ सजना बरखा बहार आई….लता के मधुर स्वरों की फुहार जब बरसी शैलेन्द्र के बोलों में

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 288 ‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर जारी है शृंखला “शैलेन्द्र- आर.के.फ़िल्म्स के इतर भी”। आज का जो गीत हमने चुना है...
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सूरज जरा आ पास आ, आज सपनों की रोटी पकाएंगें हम…एक अंदाज़ शैलेद्र का ये भी

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 287 शैलेन्द्र के लिखे गीतों को सुनते हुए आपने हर गीत में ज़रूर अनुभव किया होगा कि इन गीतों में...
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मिटटी से खेलते हो बार बार किसलिए…कुछ सवाल उस उपर वाले से शैलेन्द्र ने पूछे लता के स्वरों के जरिये

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 286 “ज़रा सी धूल को हज़ार रूप नाम दे दिए, ज़रा सी जान सर पे सात आसमान दे दिए, बरबाद...
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मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा…जब किशोर ने स्वर दिए शैलेन्द्र के शब्दों को

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 285 राज कपूर के आर.के.फ़िल्म्स के बैनर के बाहर की फ़िल्मों में लिखे हुए गीतकार शैलेन्द्र के गीतों का करवाँ...
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बहुत दिया देने वाले ने तुझको, आँचल ही न समाये तो क्या कीजै…कह तो दिया सब कुछ शैलेन्द्र ने और हम क्या कहें…

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 284 फ़िल्म संगीत के ख़ज़ाने में ऐसे अनगिनत लोकप्रिय गानें हैं जिन्होने बहुत जल्द लोकप्रियता तो हासिल कर ली, लेकिन...
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दुनिया न भाये मोहे अब तो बुला ले…निराशावादी स्वरों में भी शैलेन्द्र अपना "क्लास" नहीं छोड़ते

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 283 “मेरे गीत मेरे संग सहारे, कोई ना मेरा संसार में, दिल के ये टुकड़े कैसे बेच दूँ दुनिया के...