Tag : khayyam

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मेरी भी इक मुमताज़ थी….मधुकर राजस्थानी के दर्द को अपनी आवाज़ दी मन्ना दा ने..

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #५८ आज की महफ़िल में हम हाज़िर हैं शरद जी की पसंद की पहली नज़्म लेकर। शरद जी ने जिस नज़्म की फ़रमाईश की...
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इश्क़ की रस्म को इस तरह निभाया हमने…."अदा" के तखल्लुस से गज़ल कह रहे हैं शहरयार साहब

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #५७ आज की महफ़िल में हम हाज़िर हैं सीमा जी की पसंद की आखिरी गज़ल लेकर। सीमा जी की पसंद औरों से काफ़ी अलहदा...
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ये बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो…. महफ़िल में पहली मर्तबा "नुसरत" और "फ़ैज़" एक साथ

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #४६ पिछली कड़ी में जहाँ सारे जवाब परफ़ेक्ट होते-होते रह गए थे(शरद जी अपने दूसरे जवाब के साथ कड़ी संख्या जोड़ना भूल गए थे),...
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खुद-बखुद नींद आ जाएगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे…… तलत अज़ीज़ साहब की एक और फ़रियाद

Amit
महफ़िल-ए-ग़ज़ल #३९ आज का अंक शुरू करने से पहले हम पिछले अंक में की गई एक गलती के लिए माफ़ी माँगना चाहेंगे। यह माफ़ी सिर्फ़...
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जाने क्या ढूंढती रही है ये ऑंखें मुझमें…ढूंढते हैं हम संगीत प्रेमी आज भी उस आवाज़ को जो कहीं आस पास ही है हमेशा

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 157 ‘दस चेहरे एक आवाज़ – मोहम्मद रफ़ी’, आवाज़ पर इन दिनों आप सुन रहे हैं गायक मोहम्मद रफ़ी को...
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रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत (6)

Sajeev
रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत के नए अंक में आपका स्वागत है. आज जो गीत मैं आपके लिए लेकर आया हूँ वो...
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आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम…आजकल वो इस तरफ देखता है कम…

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 83 साहिर लुधियानवी एक ऐसे गीतकार रहे हैं कि उन्होने जो भी गाने लिखे वो आम जनता के होठों की...
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जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम….खेल अधूरा छूटे न…

Sajeev
ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 41 कहते हैं कि “ज़िंदगी हर क़दम एक नयी जंग है, जीत जाएँगे हम तू अगर संग है”. हमसफ़र का...
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पंकज सुबीर की कहानी "शायद जोशी" में लता मंगेशकर

Amit
(ये आलेख नहीं है बल्कि मेरी एक कहानी ”शायद जोशी” का अंश है ये कहानी मेरे कहानी संग्रह ”ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी” की संभावित कहानियों में...