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मोहे भूल गए सांवरिया….

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 19

दोस्तों, जब शास्त्रीय रागों की बात आती है तो फिल्मी गीतों में संगीतकारों ने समय समय पर बहुत से रागों का बहुत ही खूबसूरत इस्तेमाल किया है. लेकिन अगर ज़रा गौर किया जाए तो हम पाते हैं की कुछ राग ऐसे हैं जिनका बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता है. राग भैरवी ऐसा ही एक राग है. संगीतकार जोडी शंकर जयकिशन का यह सबसे पसंदीदा राग रहा है और इस राग पर आधारित उनके बहुत से लोकप्रिय गीत हैं. जहाँ तक राग भैरवी का सवाल है, तो संगीतकार नौशाद भी इसके असर से बच नहीं पाए हैं. उनके कई ऐसे फिल्म हैं जिनमें राग भैरवी पर आधारित गाने हैं. ऐसी ही एक फिल्म है “बैजू बावरा”. इस फिल्म में कम से कम दो गीत ऐसे हैं जो इस राग पर आधारित हैं. इनमें से एक गीत तो इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है, जी हाँ, “तू गंगा की मौज मैं जमुना का धारा”, और क्या आपको पता है दूसरा गीत कौन सा है? दूसरा गीत है “मोहे भूल गये साँवरिया”.

बैजू बावरा फिल्म का हर एक गीत किसी ना किसी शास्त्रीय राग पर आधारित है. नौशाद साहब के बारे में यही कहा जाता है की भारतीय शास्त्रीय संगीत को सरल तरीके से उन्होने आम जनता तक पहुँचाया है, जिसे हर आम आदमी गुनगुना सकता है. बैजू बावरा, नौशाद साहब के संगीत सफ़र का एक महत्वपूर्ण पडाव था. विजय भट्ट और शंकर भट्ट ने प्रकाश पिक्चर्स के ‘बॅनर’ तले इस फिल्म का निर्माण किया था. इस फिल्म का हर एक गीत ‘मास्टरपीस’ है, और हर एक गीत इस ‘ओल्ड इस गोल्ड’ शृंखला में शामिल होने की काबलियत रखता है. तो लीजिए सुनिए लता मंगेशकर की आवाज़, शक़ील बदायूँनी के बोल और नौशाद का दिव्य संगीत फिल्म बैजू बावरा से.

और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाईये कि हमारा अगला “ओल्ड इस गोल्ड” गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं –

१. कल होली है और ये गीत भी होली के रंगों में डूबा हुआ है.
२. ये गीत जिस फिल्म का है उस फिल्म के नाम का एक धारावाहिक आजकल बहुत लोकप्रिय है.
३. आर डी बर्मन और आनंद बक्षी की जोड़ी, शक्ति सामंता का निर्देशन.

कुछ याद आया…?

पिछली पहेली का परिणाम –
नीरज जी स्वागत आपका. सही जवाब के साथ एंट्री की है आपने. आचार्य जी आपकी पसंद का गीत भी जल्द ही आएगा. आशा है आपने आज के गीत का भरपूर आनंद लिया होगा. विनय जी और अन्य समस्त श्रोताओं को भो होली की शुभकामनायें. कल हमारा होली विशेषांक सुनना मत भूलियेगा.

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम ६-७ के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवायेंगे, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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