एक गीत सौ अफ़साने

ज़िंदगी जब भी तेरी बज़्म में | एक गीत सौ अफसाने

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वर्ष 1981 की चर्चित फ़िल्म ’उमराव जान’ की ग़ज़ल “ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें”। तलत अज़ीज़ की आवाज़, शहरयार के बोल, और ख़य्याम का संगीत। यह ग़ज़ल फ़िल्म की स्क्रिप्ट में बाद में कैसे आया? क्यों ख़य्याम साहब ने इस ग़ज़ल के लिए चुनी तलत अज़ीज़ की आवाज़? क्या हुआ रिहर्सलों के दौरान ख़ैयाम साहब के घर पर? क्यों इस ग़ज़ल के रेकॉर्ड हो जाने के बाद भी तलत अज़ीज़ हर शुक्रवार ख़ैयाम साहब के घर जाया करते थे? और ख़ैयाम साहब उन्हें प्यार से क्या खिलाया करते? ये सब आज के इस अंक में।

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