एक गीत सौ अफ़साने

बेताब है दिल

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शोध व आलेख : सुजॉय चटर्जी

स्वर : प्रज्ञा मिश्रा

प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन

“बेताब है दिल दर्द-ए-मोहब्बत के असर से….”

नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1947 की चर्चित फ़िल्म ’दर्द’ का गीत । सुरैया और उमा देवी की आवाज़ें, शकील बदायूनी के बोल, और नौशाद का संगीत। फ़िल्म ’दर्द’ में गीत गाने पहले उमा देवी के जीवन में कैसा दर्द था? ए. आर. कारदार के दफ़्तर में उमा देवी के किस आचरण से सब हैरान हुए जिसकी वजह से उन्हें फ़िल्म ’दर्द’ में गाने का मौका मिला? फ़िल्म’दर्द’ के गानों के बोल कैसे मेल खाते हैं उमा देवी के जीवन की घटनाओं से? अपनी पहली ही फ़िल्म में सिंगिंग स्टार सुरैया के साथ गाने का उनका अनुभव कैसा रहा? कुछ ऐसा ही कौन सा अनुभव सुरैया के शुरुआती दिनों का रहा? ये सब आज के इस अंक में।

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