Poetry

मिलिए कवि जुवी शर्मा की काव्यात्मक दुनिया से

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मैं तुमसे प्रेम करती हूं

मैं तुमसे प्रेम करती हूं
उसे लाखों बार कहा था
उसके बाद शब्दों का धड़ मात्र शेष रह गया
शब्दों को अंत्येष्टि की आवश्यकता नहीं होती
वे अनायास ही मौन हो जाते है
प्रेम औचक नहीं मरा
पहले संवाद खत्म हुए
संवाद ने अपना प्रतिशोध लेने
प्रेम में बोए उस अमलतास पर जलती तीली फेंक दी
बच गई अवशेषों की निराई
विखंडन के बीज अब अमरबेल की तरह फल फूल रहे है…..
स्नेहिल श्रुतियाँ दोहराई नहीं जाती
प्रेम एक व्यक्ति से कई बार किया जा सकता है
किंतु कइयों से प्रेम की संस्कृति
अवनति की सन्तति बन जाती है
मानव सभ्यता का पतन इसी बाबत होगा
एंटीक फ्रेम में जड़ स्मृतियां
पुराने कैसेट की तरह गा रही है
मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हूं …
जुवि शर्मा
जुवि जी की कविताओं में आत्मीयता है , एक प्रवाह , एक कहन साथ साथ चलता है । उनकी कविताएं पाठकों को अचानक से अचंभित कर देती है ।
Speakers: Supriya Purohit, Amandeep Gujral, Manuj mehta, Juvi Sharma, Manmeet Soni

Speakers: Supriya Purohit, Amandeep Gujral, Manuj mehta, Juvi Sharma, Manmeet Soni

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