एक गीत सौ अफ़साने

कभी न कभी, कहीं न कहीं, कोई न कोई तो आएगा

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वर्ष 1964 की चर्चित फ़िल्म ’शराबी’ का गीत “कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, कोई ना कोई तो आएगा”। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, राजिन्दर कृष्ण के बोल, और मदन मोहन का संगीत। 1958 में बन कर प्रदर्शित होने वाली इस फ़िल्म को बन कर तैयार होने में छह साल क्यों लग गए? इस गीत में1958 की दादा बर्मन के किस गीत के साथ समानता नज़र आती है? इस गीत के साथ रफ़ी साहब और बनारस का कौन सा मार्मिक किस्सा जुड़ा हुआ है? साथ ही राजिन्दर कृष्ण की लेखनी का विश्लेषण। ये सब आज के इस अंक में।

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