Philosophy

क्या आपने पृथ्वी पर रहने का किराया दिया है ?

“कोई जगह तो है मेरे सपनों के लिए , वो घरौंदा ही सही मिट्टी का भी घर होता है” दुष्यंत त्यागी जी की यह पंक्तियाँ पढ़कर आपको अपना प्यारा घर याद आ रहा होगा । आपके सपनों का घर जो आपका खुद का हो सकता है, किराये का हो सकता है, फ़्लैट हो सकता है, बंगला हो सकता है, आपका स्वयं का खरीदा हुआ हो सकता है या आपके पुरखों का दिया हुआ भी हो सकता है ।घर के नाम पर आपको यह भी याद आयेगा कि कितने संघर्ष के बाद आपको यह घर मिला है,आपने या आपके पिता ने पहले ज़मीन खरीदी होगी फिर बिल्डर के चक्कर लगाये होंगे या फ़्लैट के लिए किश्तें चुकाईं होंगी ,घर बनता हुआ देख कर खुश हुए होंगे मन में डर भी लगता रहा होगा कि कोई धोखाधड़ी न हो ? इस एपिसोड में हम इसी विषय पर बात करेंगे लेकिन “पृथ्वी पर रहने का किराया ?” यह शीर्षक देखकर आप चौंके होंगे । आपने तो जमीन पर अपना घर या फ़्लैट बना लिया और उसकी कीमत या किराया अदा कर दिया लेकिन आपसे पहले जो मालिक था उसने किसको किराया दिया ? हो सकता है उसने अपने से पहले वाले को दिया हो ? लेकिन उससे भी पहले यानी सबसे पहले जिसने उस जमीन पर अपना मालिकाना हक़ जताया उसने किराया किसको दिया ? लीजिए सुनिए ये दिलचस्प पॉडकास्ट

Speakers: Sharad Kokas, DrVasudha Mishra, Richa Sharma, Jack Abbott.

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