एक गीत सौ अफ़साने

Saawan Ke Nazare Hain | Ek Geet Sau Afsane

आलेख : सुजॉय चटर्जी

स्वर :  अल्पना सक्सेना

प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन

नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। हाल ही में Hindi Podcast Community ने साल 2021 के श्रेष्ठ हिन्दीpodcasts की सूची में आपके इस मनचाहे स्तम्भ ’एक गीत सौ अफ़साने’ को जगह् दी है, इसके लिए हम आप सभी श्रोताओं को धन्यवाद देते हैं। इसी तरह से आप अपना सहयोग हमें देते रहें और इस स्तम्भ के माध्यम से गीत-संगीत से जुड़ी रोचक जनकारियों का आनन्द उठाते रहें! आज के इस अंक के लिए हमने चुना है1941 की फ़िल्म ’ख़ज़ांची’ का गीत “सावान के नज़ारे हैं”, जिसे शमशाद बेगम, मास्टर ग़ुलाम हैदर और साथियों ने गाया है। वली साहब के बोल और ग़ुलाम हदर का संगीत। कौन-कौन सी हैं इस गीत से जुड़ी ख़ास बातें? क्यों हुआ यह गीत अपने ज़माने में बेहद मशहूर? क्या रिश्ता है इस गीत की अभिनेत्री रमोला का साइकिल के साथ? जब इस फ़िल्म का रीमेक बना तो इस गीत के सिचुएशन के लिए क्या तय हुआ? जानिए ये तमाम बातें, आज के इस अंक में।

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