Uncategorized एक गीत सौ अफ़साने

“क़स्मे, वादे, प्यार, वफ़ा, सब बातें हैं…..”

कस्मे, वादे, प्यार, वफ़ा सब बातें हैं

एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 08 ||

फिल्म – उपकार
आलेख- सुजॉय चटर्जी
स्वर- शुभ्रा ठाकुर
प्रस्तुति- संज्ञा टंडन

‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह स्तंभ ‘एक गीत सौ अफ़साने’। आज की कड़ी में प्रस्तुत है 1967 की चर्चित फ़िल्म ’उपकार’ के प्रसिद्ध गीत “क़समें वादे प्यार वफ़ा सब बाते हैं” के बनने की कहानी।

“क़स्मे वादे प्यार् वफ़ा सब बातें हैं, बातों का क्या” कैसे बना था यह गीत? आनन्दजी का ऐक्सिडेन्ट होना, उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाई का अनुभव होना, उनके अफ़्रीकी मित्र का प्यार में धोखा खाना, इन सब ने कैसे नीव रखी इस गीत की? और गीत को बनाते हुए एक मकाम पे जाकर सबके रोंगटे क्यों खडे हो गए कि फिर गीत को वहीं छोड़ दिया? ये सब जानिए आज के इस अंक से।

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