एक गीत सौ अफ़साने

“ससुराल गेंदा फूल…”

एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 10 ||

फिल्म – दिल्ली 6
आलेख- सुजॉय चटर्जी
स्वर- अनुज श्रीवास्तव
प्रस्तुति- संज्ञा टंडन

‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह स्तंभ ‘एक गीत सौ अफ़साने’। आज की कड़ी में प्रस्तुत है चर्चित फ़िल्म ’Delhi-6’ के प्रसिद्ध गीत “ससुराल गेन्दाफूल” के बनने की कहानी।

कैसे योजना बनी फ़िल्म ’Delhi-6′ में एक लोक-संगीत आधारित गीत रखने की? और इसके लिए छत्तीसगढ़ी लोक गीत को ही क्यों चुना गया? कैसी समस्या खड़ी हुई रघुवीर यादव और ए. आर. रहमान की सोच में मतभेद की वजह से? और गायिका रेखा भारद्वाज का क्या कहना है इस गीत के रिहर्सल और फ़ाइनल टेक के बीच अन्तर को लेकर? इन सवालों पर से परदा उठाने के लिए प्रस्तुत है ’एक गीत सौ अफ़साने’ का आज का यह अंक।

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