राग - भारतीय शास्त्रीय संगीत

इंडियन राग सीरीज || एपिसोड 05 || दोनों मध्यम स्वर वाले राग – 2 : राग केदार

इंडियन राग सीरीज की पाँचवी कड़ी में सुनिए राग केदार से जुड़ी जानकारियाँ 

राग, रेडियो प्लेबैक इंडिया की एक कोशिश है भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को सरल भाषा में समझने समझाने की, प्रोग्राम हेड संज्ञा टंडन द्वारा संचालित इस कार्यक्रम हर सप्ताह बात होगी सुर, ताल, स्वर, लय और और वाध्य की। अगर आप भी शास्त्रीय संगीत में रुचि रखते हैं या फिर किसी न किसी रूप में शास्त्रीय संगीत परंपरा से जुड़े हुए हों तो संपर्क करें । 

आलेख -कृष्णमोहन मिश्रा

प्रस्तुति – संज्ञा टंडन

दो मध्यम केदार में, स म संवाद सम्हार,

आरोहण रे ग बरज कर, उतरत अल्प गान्धार।

 भक्तिरस की अभिव्यक्ति के लिए केदार एक समर्थ राग है। कर्नाटक संगीत पद्यति में राग हमीर कल्याणी, राग केदार के समतुल्य है। औड़व-षाड़व जाति, अर्थात आरोह में पाँच और अवरोह में छह स्वरों का प्रयोग होने वाला यह राग कल्याण थाट के अन्तर्गत माना जाता है। प्राचीन ग्रन्थकार राग केदार को बिलावल थाट के अन्तर्गत मानते थे, आजकल अधिकतर गुणिजन इसे कल्याण थाट के अन्तर्गत मानते हैं। इस राग में दोनों मध्यम का प्रयोग होता है। शुद्ध मध्यम का प्रयोग आरोह और अवरोह दोनों में तथा तीव्र मध्यम का प्रयोग केवल अवरोह में किया जाता है। आरोह में ऋषभ और गान्धार स्वर और अवरोह में गान्धार स्वर वर्जित होता है। कभी-कभी अवरोह में गान्धार स्वर का अनुलगन कण का प्रयोग कर लिया जाता है। राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। इस दृष्टि से यह उत्तरांग प्रधान राग होगा, क्योंकि मध्यम स्वर उत्तरांग का और षडज स्वर पूर्वाङ्ग का स्वर होता है। मध्यम स्वर का समावेश सप्तक के पूर्वांग में नहीं हो सकता। राग का एक नियम यह भी है कि वादी-संवादी दोनों स्वर सप्तक के अंग में नहीं हो सकते। इस दृष्टि से यह राग उत्तरांग प्रधान तथा दिन के उत्तर अंग में अर्थात रात्रि 12 बजे से दिन के 12 बजे के बीच गाया-बजाया जाना चाहिए। परन्तु राग केदार प्रचलन में इसके ठीक विपरीत रात्रि के पहले प्रहर में ही गाया-बजाया जाता है। राग केदार उपरोक्त नियम का अपवाद है। इस राग का गायन-वादन रात्रि के पहले प्रहर में किया जाता है।

आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं 
हम से जुड़ सकते हैं –
To Join the indian raaga team, please write to sangya.tandon@gmail.com 
Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com

Related posts

स्वरगोष्ठी – 508: “चलो झूमते सर से बांधे कफ़न …” : राग – कोमल ऋषभ आसावरी :: SWARGOSHTHI – 508 : RAG – KOMAL RISHABH ASAVARI

PLAYBACK

“आ अब लौट चलें”: राग काफ़ी : स्वरगोष्ठी – 504 : SWARGOSHTHI – 504 : RAG KAFI

PLAYBACK

इंडियन राग सीरीज || एपिसोड 02 || रंग-गुलाल के उड़ते बादलों के बीच धमार का धमाल

Sajeev

Leave a Comment