Dil se Singer

राग शिवरंजनी : SWARGOSHTHI – 460 : RAG SHIVARANJANI







स्वरगोष्ठी – 460 में आज


काफी थाट के राग – 4 : राग शिवरंजनी



पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया से बाँसुरी पर शिवरंजिनी की एक रचना और मन्ना डे व आशा भोसले से फिल्मी गीत सुनिए

पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया
मन्ना डे और आशा भोसले

“रेडियो
प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी
श्रृंखला “काफी थाट के राग” की चौथी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब
संगीत प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने
वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा थाट व्यवस्था है। भारतीय
संगीत में सात शुद्ध, चार कोमल और एक तीव्र अर्थात कुल बारह स्वरों का
प्रयोग होता है। एक राग की रचना के लिए इन बारह स्वरों में से कम से कम
पाँच का होना आवश्यक होता है। संगीत में थाट रागों के वर्गीकरण की पद्धति
है। सप्तक के बारह में से मुख्य सात स्वरों के क्रमानुसार उस समुदाय को थाट
कहते हैं, जिससे राग उत्पन्न होते हों। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण
भारतीय संगीत पद्धति में 72 मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत
पद्धति में 10 थाट का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु
नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ किया था। वर्तमान समय में रागों के
वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है। भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये दस
थाट हैं; कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव, पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी
और भैरवी। इन सभी प्रचलित और अप्रचलित रागों को इन्हीं दस थाट के अन्तर्गत
सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में थाट स्वरों के उस समूह को कहते हैं
जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता है। पन्द्रहवीं शताब्दी के
उत्तरार्द्ध में ‘राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक लोचन कवि ने रागों के
वर्गीकरण की परम्परागत ‘ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का परिमार्जन कर मेल
अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस समय सोलह हज़ार राग
प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी में थाट के अन्तर्गत
रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली का उल्लेख सत्रहवीं
शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक ग्रन्थों में भी किया गया
है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का प्रयोग लगभग तीन सौ वर्षों
तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम और बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक
दशकों में पण्डित भातखण्डे ने भारतीय संगीत के बिखरे सूत्रों को न केवल
संकलित किया बल्कि संगीत के कई सिद्धान्तों का परिमार्जन भी किया। भातखण्डे
जी द्वारा निर्धारित दस थाट में से सातवाँ थाट काफी है। इस श्रृंखला में
हम काफी थाट के रागों पर क्रमशः चर्चा कर रहे हैं। प्रत्येक थाट एक आश्रय
अथवा जनक राग होता है और शेष जन्य राग कहलाते हैं। आपके लिए इस श्रृंखला
में हम काफी थाट के जनक और जन्य रागों पर चर्चा कर रहे हैं। आज के अंक में
काफी थाट के जन्य राग शिवरंजनी के बारे में चर्चा करेंगे। आज श्रृंखला की
चौथी कड़ी में पहले हम आपको सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया
से बाँसुरी पर राग शिवरंजनी में निबद्ध एक रचना का रसास्वादन कराएंगे और
फिर इसी राग पर आधारित 1971 में प्रदर्शित एक हिन्दी फिल्म “पराया धन” का
श्रृंगार के विरह पक्ष को उकेरते एक होली गीत मन्ना डे और आशा भोसले के
स्वर में प्रस्तुत करेंगे। इस फिल्म के संगीतकार राहुलदेव बर्मन हैं।

राग शिवरंजनी
काफी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। इस राग में मध्यम और निषाद स्वर
वर्जित होता है। शेष पाँच स्वर होने के कारण यह औड़व-औड़व जाति का राग होता
है। इस राग में गान्धार स्वर कोमल प्रयोग किया जाता है। राग का वादी स्वर
पंचम और संवादी स्वर षडज होता है। आरोह के स्वर है; सा, रे, ग (कोमल), प,
ध, सां और अवरोह के स्वर हैं; सां, ध, प, ग (कोमल), रे, सा। इस राग के कोमल
गान्धार स्वर को यदि शुद्ध गान्धार बना कर प्रयोग किया जाए तो राग भूपाली
की अनुभूति होगी। यह ठुमरी अंग का राग माना जाता है। अतः इस राग में ठुमरी,
दादरा, सुगम संगीत और फिल्म संगीत अधिक गाये जाते हैं। इस राग का गायन
अथवा वादन रात्रि के दूसरे प्रहर से लेकर मध्यरात्रि तक किया जाना उपयुक्त
होता है। परन्तु ठुमरी रात्रि के पहले प्रहर में भी गायी जा सकती है। राग
शिवरंजनी में श्रृंगार, विरह और भक्तिरस की रचनाएँ खूब निखरती हैं। राग के
शास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए अब हम इस राग में एक वाद्य संगीत की एक
रचना प्रस्तुत कर रहे हैं। इसे प्रस्तुत कर रहे हैं, सुप्रसिद्ध बाँसुरी
वादक पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया। आप श्रृंगार के विरह पक्ष को उकेरती यह
रचना सुनिए।
राग शिवरंजिनी : बाँसुरी पर इस राग में निबद्ध एक रचना : पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया

फिल्मों
में राग शिवरंजनी पर आधारित कई गीत लोकप्रिय हुए हैं। इनमें से हमने होली
की हुड़दंग के बीच नायिका की विरह वेदना को अभिव्यक्त करते एक गीत का चुनाव
किया है। अभी गत सप्ताह ही हमने रंगो के इस मादक पर्व को धूमधाम से मनाया
है। अब हम आपको 1971 में प्रदर्शित फिल्म “पराया धन” से एक होली गीत मन्ना
डे और आशा भोसले के स्वरों में सुनवा रहे हैं। फिल्म की प्रमुख भूमिकाओं
में राकेश रोशन, हेमा मालिनी, बलराज साहनी और ओमप्रकाश थे। आनन्द बक्शी के
गीत को राहुलदेव बर्मन ने संगीतबद्ध किया है। “फिल्मी गीतों में राग” विषयक
शोधकर्ता और संगीत विषयक सुप्रसिद्ध लेखक कन्हैयालाल पाण्डेय के सुझाव से
हम आज के इस गीत का चुनाव कर रहे हैं। श्री पाण्डेय के अनुसार इस गीत में
राग शिवरंजनी के साथ ही राग काफी का स्पर्श भी है। आप यह होली गीत सुनिए और
मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।
राग शिवरंजनी : “होली रे होली…” : मन्ना डे और आशा भोसले : फिल्म – पराया धन

संगीत पहेली


‘स्वरगोष्ठी’
के 460वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1952 में प्रदर्शित एक
फिल्म के गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक
अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के सही
उत्तर देना आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों
का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इस अंक की
पहेली का उत्तर प्राप्त होने के बाद तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक
होंगे उन्हें वर्ष के प्रथम सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही
पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की
घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का प्रभाव है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका का स्वर है?
आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia9@gmail.com
पर ही शनिवार 21 मार्च, 2020 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि
उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली
प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। फेसबुक पर पहेली का उत्तर स्वीकार
नहीं किया जाएगा। विजेताओं के नाम हम उनके शहर/ग्राम, प्रदेश और देश के
नाम के साथ “स्वरगोष्ठी” के अंक संख्या 462 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक
में प्रस्तुत गीत, संगीत या कलाकार के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने
किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में
स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia9@gmail.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।
पिछली पहेली के सही उत्तर और विजेता


“स्वरगोष्ठी”
के 458वें अंक में हमने आपको 1944 में प्रदर्शित फिल्म “गाली” से एक राग
आधारित होली गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से कम से कम दो सही उत्तरों
की अपेक्षा की थी। पहेली के पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – शहाना, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – दीपचन्दी तथा तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – मिस मंजु

‘स्वरगोष्ठी’ की इस पहेली का सही उत्तर देने वाले हमारे विजेता हैं; चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, अहमदाबाद, गुजरात से मुकेश लाडिया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी।
उपरोक्त सभी प्रतिभागियों में किसी भी प्रतिभागी के तीनों उत्तर सही नहीं
मिले। डॉ. किरीट छाया के तीन में से केवल एक उत्तर ही सही है, अतः उन्हें
केवल एक अंक ही मिलते हैं। शेष प्रतिभागियों को दो उत्तर सही होने पर
प्रत्येक को दो अंक मिलते हैं। ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से आप सभी
को हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया
अपना उत्तर ई मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नए
प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के
तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक उत्तर भी
ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।
अपनी बात
मित्रों,
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी
नई श्रृंखला “काफी थाट के राग” की चौथी कड़ी में आज आपने काफी थाट के जन्य
राग शिवरंजनी का परिचय प्राप्त किया। साथ ही इस राग के शास्त्रीय स्वरूप को
समझने के लिए आपने सुविख्यात संगीतज्ञ पण्डित हरिप्रसाद चौरसिया की
बाँसुरी के स्वर में इस राग की एक हृदयस्पर्शी रचना का रसास्वादन किया। राग
शिवरंजनी के आधार पर रचे गए फिल्मी गीत के उदाहरण के लिए हमने आपके लिए
1971 में प्रदर्शित फिल्म “पराया धन” का एक युगलगीत मन्ना डे और आशा भोसले
के स्वर में प्रस्तुत किया। फिल्म के संगीतकार राहुलदेव बर्मन हैं। कुछ
तकनीकी समस्या के कारण हम अपने फेसबुक के मित्र समूह पर “स्वरगोष्ठी” का
लिंक साझा नहीं कर पा रहे हैं। सभी संगीत अनुरागियों से अनुरोध है कि हमारी
वेबसाइट https://radioplaybackindia.com अथवा http://139.59.14.115/rpi/wordpress
पर क्लिक करके हमारे सभी साप्ताहिक स्तम्भों का अवलोकन करते रहें।
“स्वरगोष्ठी” के वेब पेज के दाहिनी ओर निर्धारित स्थान पर अपना ई-मेल आईडी
अंकित कर आप हमारे सभी पोस्ट को नियमित रूप से अपने ई-मेल पर प्राप्त कर
सकते है। “स्वरगोष्ठी” की पिछली कड़ियों के बारे में हमें अनेक पाठकों की
प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी
“स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया
हमें भेजते रहेंगे। आज के इस अंक अथवा श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ
कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia9@gmail.com
पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः सात बजे “स्वरगोष्ठी” के
इसी मंच पर एक बार फिर संगीत के सभी अनुरागियों का स्वागत करेंगे।
प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  


रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
 राग शिवरंजनी : SWARGOSHTHI – 460 : RAG SHIVARANJANI : 15 मार्च, 2020 

Related posts

जारी है ‘सिने पहेली’ का जंग, आप अब भी बन सकते हैं इसके जंगबाज़…

PLAYBACK

हिंद युग्म ने मेरे सपनों को रंग और पंख दिये…

Amit

रोज शाम आती थी, मगर ऐसी न थी…..जब शाम के रंग में हो एल पी के मधुर धुनों की मिठास, तो क्यों न बने हर शाम खास

Sajeev

Leave a Comment