Dil se Singer

वर्ष के महाविजेता – 2 : SWARGOSHTHI – 451 : MAHAVIJETA OF THE YEAR – 2






स्वरगोष्ठी 451 में आज

महाविजेताओं की प्रस्तुतियाँ – 2 

संगीत पहेली के महाविजेताओं क्षिति तिवारी, डॉ. किरीट छाया और प्रफुल्ल पटेल का उनकी प्रस्तुतियों से अभिनन्दन


क्षिति तिवारी
डॉ. किरीट छाया

‘रेडियो
प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर सभी
संगीत-प्रेमियों का नये वर्ष के दूसरे अंक में कृष्णमोहन मिश्र की ओर से
हार्दिक अभिनन्दन है। पिछले अंक में हमने आपसे ‘स्वरगोष्ठी’ स्तम्भ के बीते
वर्ष की कुछ विशेष गतिविधियों की चर्चा की थी। साथ ही पहेली के चौथे और
पाँचवें महाविजेता डी. हरिणा माधवी और मुकेश लाडिया से आपको परिचित कराया
था और उनकी प्रस्तुतियों को भी सुनवाया था। इस अंक में भी हम गत वर्ष की
कुछ अन्य गतिविधियों का उल्लेख करने के साथ ही संगीत पहेली के प्रथम,
द्वितीय और तृतीय महाविजेताओं की घोषणा करेंगे और उनका सम्मान भी करेंगे।
‘स्वरगोष्ठी’ के पाठक और श्रोता जानते हैं कि इस स्तम्भ के प्रत्येक अंक
में संगीत पहेली के माध्यम से हम हर सप्ताह भारतीय संगीत से जुड़े तीन
प्रश्न देकर पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए आपसे कम से कम दो प्रश्नों का
उत्तर पूछते हैं। आपके दिये गये सही उत्तरों के प्राप्तांकों की गणना दो
स्तरों पर की जाती है। ‘स्वरगोष्ठी’ प्रत्येक दस कड़ियों को पाँच कड़ियों
(सेगमेंट) में बाँट कर और फिर वर्ष के अन्त में सभी पाँच सत्रों के
प्रतिभागियों के प्राप्तांकों की गणना की जाती है। वर्ष 2019 की संगीत
पहेली में अनेक प्रतिभागी नियमित रूप से भाग लेते रहे। 448वें अंक की पहेली
के परिणाम आने तक शीर्ष के पाँच महाविजेता चुने गए। अंकों की गणना करने के
बाद सर्वाधिक 94 अंक पाकर क्षिति तिवारी ने ने प्रथम, 92 अंक पाकर डॉ.
किरीट छाया ने द्वितीय और 90 अंक प्राप्त कर प्रफुल्ल पटेल ने तीसरा स्थान
प्राप्त किया। आज के अंक में हम प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के
महाविजेताओं क्रमशः, क्षिति तिवारी, डॉ. किरीट छाया और प्रफुल्ल पटेल का
अभिनन्दन करेंगे और उनकी प्रस्तुतियाँ सुनवाएँगे।

वर्ष
2019 की संगीत पहेली में सर्वाधिक 94 अंक अर्जित कर जबलपुर, मध्यप्रदेश की
क्षिति तिवारी ने प्रथम महाविजेता होने का गौरव प्राप्त किया है। संगीत
पहेली में प्रथम महाविजेता होने का सम्मान प्राप्त करने वाली जबलपुर,
मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी की संगीत शिक्षा लखनऊ और कानपुर में
सम्पन्न हुई। लखनऊ के भातखण्डे संगीत महाविद्यालय से गायन में प्रथमा से
लेकर विशारद तक की परीक्षाएँ उत्तीर्ण की। बाद में इस संस्थान को
विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ, जहाँ से उन्होने संगीत निपुण और उसके
बाद ठुमरी गायन मे तीन वर्षीय डिप्लोमा भी प्राप्त किया। इसके अलावा कानपुर
के वरिष्ठ संगीतज्ञ पण्डित गंगाधर राव तेलंग जी के मार्गदर्शन में खैरागढ़,
छत्तीसगढ़ के इन्दिरा संगीत कला विश्वविद्यालय की संगीत स्नातक और
स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। क्षिति जी के गुरुओं में डॉ. गंगाधर राव
तेलंग के अलावा पण्डित सीताशरण सिंह, पण्डित गणेशप्रसाद मिश्र, डॉ.
सुरेन्द्र शंकर अवस्थी, डॉ. विद्याधर व्यास और विनीत पवईया प्रमुख हैं।
क्षिति को स्नातक स्तर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से ग्वालियर
घराने की गायकी के अध्ययन के लिए दो वर्ष की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी मिल
चुकी है। कई वर्षों तक लखनऊ के महिला कालेज और जबलपुर के एक नेत्रहीन
बच्चों के विद्यालय मे माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा
देने के बाद वर्तमान में जबलपुर के ‘महाराष्ट्र संगीत महाविद्यालय’ में
संगीत गायन की शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और भजन
गायन के अलावा उन्होने प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव से गुरु-शिष्य परम्परा के
अन्तर्गत लोक संगीत भी सीखा है, जिसे अब वह अपने विद्यार्थियों में बाँट
रही हैं। क्षिति जी कथक नृत्य और नृत्य नाटिकाओं में गायन संगति की
विशेषज्ञ हैं। सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय की
पूर्व प्रोफेसर कुमकुम धर और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय की
प्रोफेसर और नृत्यांगना विधि नागर के कई कार्यक्रमों में अपनी इस प्रतिभा
का प्रदर्शन कर चुकी हैं। आज के इस विशेष अंक में क्षिति तिवारी के कथक
नृत्य के साथ गायन संगति की एक रिकार्डिंग हम प्रस्तुत कर रहे हैं। इस
रिकार्डिंग में क्षिति तिवारी पहले राग यमन में निबद्ध शिवस्तुति, “नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय…” प्रस्तुत किया है। अगले चरण में नृत्यांगना के भाव प्रदर्शन के लिए उन्होने राग तिलक कामोद की एक बन्दिश “नीर भरन कैसे जाऊँ…” का गायन प्रस्तुत किया है। लीजिए, अब आप यह रचनाएँ सुनिए और प्रथम महाविजेता क्षिति तिवारी का अभिनन्दन कीजिए।
राग यमन और तिलक कामोद : शिवस्तुति और बन्दिश “नीर भरन कैसे जाऊँ…” : स्वर – क्षिति तिवारी

वोरहीज,
न्यूजर्सी के डॉ. किरीट छाया ने 2019 की संगीत पहेली में 92 अंक अर्जित कर
द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। किरीट जी पेशे से चिकित्सक हैं और अमेरिका
में 1971 से प्रवास कर रहे हैं। मुम्बई से चिकित्सा विज्ञान से एम.डी.
करने के बाद आप सपत्नीक अमेरिका चले गए। बचपन से ही किरीट जी के कानों में
संगीत के स्वर स्पर्श करने लगे थे। उनकी बाल्यावस्था और शिक्षा-दीक्षा
शास्त्रीय संगीत के प्रेमी और पारखी मामा और मामी के संरक्षण में बीता।
बचपन में ही मामा-मामी से सुने हुए भारतीय संगीत के स्वरों के कारण किरीट
जी का संगीत के प्रति निरन्तर अनुराग बना रहा। किरीट जी न तो स्वयं गाते
हैं और न बजाते हैं, परन्तु संगीत सुनने के दीवाने हैं। वह इसे अपना
सौभाग्य मानते हैं कि उनकी पत्नी को भी संगीत के प्रति लगाव है। नब्बे के
दशक के मध्य में किरीट जी ने अमेरिका में रह रहे कुछ संगीत अनुरागी
परिवारों के सहयोग से “रागिनी म्यूजिक सर्कल” नामक संगीत संस्था का गठन
किया है। इस संस्था की ओर से प्रायः संगीत के अनुष्ठान और संगोष्ठ आदि का
आयोजन किया जाता है। अब तक उस्ताद विलायत खाँ, उस्ताद अमजद अली खाँ, पण्डित
अजय चक्रवर्ती, पण्डित मणिलाल नाग, पण्डित बुद्धादित्य मुखर्जी आदि की
संगीत सभाओं का आयोजन यह संस्था कर चुकी है। दो वर्ष पूर्व विदुषी कौशिकी
चक्रवर्ती की संगीत सभा का फिलेडेल्फिया नामक स्थान पर सफलतापूर्वक आयोजन
किया गया था। किरीट जी गैस्ट्रोएंट्रोंलोजी चिकित्सक के रूप में विगत 40
वर्षों तक सेवा करने के बाद जुलाई, 2014 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति
के बाद किरीट जी अब अपना अधिकांश समय अपनी अभिरुचि; फोटोग्राफी के साथ
शास्त्रीय संगीत और वर्ष 1950 से 1970 के बीच के फिल्म संगीत के श्रवण को
दे रहे हैं। “स्वरगोष्ठी” के मंच से किरीट जी का सम्पर्क हमारी एक नियमित
पाठक और प्रतिभागी श्रीमती विजया राजकोटिया के माध्यम से हुआ है। किरीट जी
हमारे नियमित सहभागी हैं और संगीत के प्रति अपने अनुराग के कारण और स्वरों
की समझ के कारण वर्ष 2019 के संगीत पहेली के दूसरे महाविजेता बने हैं।
रेडियो प्लेबैक इण्डिया परिवार उन्हें यह महाविजेता का सम्मान सादर समर्पित
करता है। हमारी परम्परा है कि हम जिन्हें सम्मानित करते हैं स्वयं उनका
अथवा उनकी पसन्द का संगीत सुनवाते हैं। लीजिए, प्रस्तुत है, डॉ. किरीट छाया
द्वारा प्रेषित यू-ट्यूब का यह वीडियो। इस वीडियो के माध्यम से हम आपको
उस्ताद राशिद खाँ के स्वर में राग आभोगी में खयाल सुनवा रहे हैं।
राग आभोगी : उस्ताद राशिद खाँ के स्वर में खयाल गायन : प्रेषक – डॉ. किरीट छाया

प्रफुल्ल पटेल

पहेली
प्रतियोगिता में 90 अंक प्राप्त कर तीसरे महाविजेता बने हैं, चेरीहिल,
न्यूजर्सी के प्रफुल्ल पटेल। भारतीय शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखने
वाले प्रफुल्ल पटेल न्यूजर्सी, अमेरिका में रहते हैं। साप्ताहिक स्तम्भ,
‘स्वरगोष्ठी’ को पसन्द करने वाले प्रफुल्ल जी शास्त्रीय संगीत के अलावा
भारतीय लोकप्रिय संगीत और सुरुचिपूर्ण फिल्म संगीत भी रुचि के साथ सुनते हैं। इस प्रकार के संगीत से
उन्हें गहरी रुचि है। परन्तु कहते हैं कि उन्हें पाश्चात्य संगीत ने कभी भी
प्रभावित नहीं किया। पेशे से इंजीनियर, भारतीय मूल के प्रफुल्ल जी पिछले
पचास वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। प्रफुल्ल जी स्वान्तःसुखाय
हारमोनियम भी बजाते हैं और स्वयं गाते भी है, किन्तु बताते हैं कि उनकी गायन
और वादन का स्तर ‘स्वरगोष्ठी’ में प्रसारित गायन अथवा वादन जैसा नहीं है।
जब हमने उनका गाया-बजाया अथवा उनकी पसन्द का आडियो या वीडियो क्लिप उनसे
भेजने का अनुरोध किया तो पहले उन्होने संकोच के साथ टाल दिया। हमारे दोबारा
आग्रह पर उन्होने अपनी आवाज़ में एक आकर्षक गैरफ़िल्मी गीत हमें भेज दिया।
‘स्वरगोष्ठी’ की पहेली में नियमित रूप से भाग लेने वाले प्रफुल्ल जी के
संगीत ज्ञान का अनुमान इसी तथ्य से किया जा सकता है कि वर्ष 2019 की पहेली
प्रतियोगिता में 90 अंक अर्जित कर प्रफुल्ल पटेल जी ने वार्षिक महाविजेताओ की
सूची में तीसरे महाविजेता का सम्मान प्राप्त किया है। “स्वरगोष्ठी” के आज
के अंक के माध्यम से “रेडियो प्लेबैक इण्डिया” सभी संचालक और सम्पादक मण्डल
के सदस्यों के साथ-साथ समस्त पाठको/श्रोताओं सहित प्रफुल्ल जी का महाविजेता के रूप में हार्दिक अभिनन्दन करते हैं
और उनकी आवाज़ में एक गैरफ़िल्मी गीत “मुझे न सपनों से बहलाओ…”
प्रस्तुत कर रहे हैं। मूल गीत सुप्रसिद्ध गायक जगमोहन (जगनमय मित्रा) के
स्वर में 1945 में जारी उनके अलबम में शामिल है। आप इस मोहक गायन का
रसास्वादन कीजिए और हमे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।
इस अंक से हमारी पहेली प्रतियोगिता की पुनः शुरुआत हो रही है। आप सभी इसमें
भाग लेना न भूलिए।

गैरफ़िल्मी गीत : “मुझे न सपनों से बहलाओ…” : स्वर – प्रफुल्ल पटेल

संगीत पहेली


“स्वरगोष्ठी”
की वर्ष 2020 की यह दूसरी कड़ी है। इस 451वीं कड़ी से हम पहेली प्रतियोगिता
का शुभारम्भ कर रहे हैं। इस पहेली में आज हम 1966 में प्रदर्शित एक फिल्म
के एक रागबद्ध गीत का अंश प्रस्तुत कर रहे हैं। इस गीतांश को सुन कर आपको
हमारे निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों का सही उत्तर देना
अपेक्षित है। हर सही दो उत्तरों पर आपको दो अंक प्रदान किए जाएँगे। अपने
निवास स्थान के पते के साथ अपना उत्तर नीचे दिए गए ई-मेल आईडी पर ही भेजें।
अंक संख्या 460 तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे उन्हें प्रथम सत्र
का विजेता घोषित किया जाएगा। इस वर्ष की अन्तिम पहेली का उत्तर प्राप्त
होने तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2020 का
महाविजेता घोषित किया जाएगा।

1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग की छाया है?

2 – इस गीत को किस ताल में निबद्ध किया गया है, हमें ताल का नाम बताइए।

3 – इस गीत में मुख्य स्वर किस पार्श्वगायिका का है?
आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com
अथवा radioplaybackindia9@gmail.com पर ही शनिवार, 18 जनवरी, 2020 की मध्यरात्रि तक अपने पते के साथ भेज सकते
हैं। इसके बाद आपका उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। आपको यदि उपरोक्त तीन
में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता
में भाग ले सकते हैं। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर
स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम
के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के अंक संख्या 453 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में
प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या
अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी
में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से अथवा swargoshthi@gmail.com और radioplaybackindia9@gmail.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।
पिछली पहेली के सही उत्तर और विजेता


“स्वरगोष्ठी”
के 449वें अंक की पहेली में हमने आपसे पहेली का कोई भी प्रश्न नहीं पूछा
था, अतः इस अंक में कोई भी सही उत्तर और विजेताओं के नाम हम प्रकाशित नहीं
कर रहे हैं। अब विजेताओं के नाम और पहेली के सही उत्तर हम 453वें अंक में
प्रकाशित करेंगे। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया
अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये
प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के
तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर
ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।
अपनी बात
मित्रों,
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी
श्रृंखला “महाविजेताओं की प्रस्तुतियाँ” की इस दूसरी कड़ी में पहेली
प्रतियोगिता के प्रथम तीन महाविजेताओ; क्षिति तिवारी, डॉ. किरीट छाया और
प्रफुल्ल पटेल का परिचय दिया और उनकी स्वयं की अथवा उनके द्वारा प्रेषित
संगीत का रसास्वादन किया। अगले अंक से हम एक नई श्रृंखला का शुभारम्भ
करेंगे। कुछ तकनीकी समस्या के कारण “स्वरगोष्ठी” की पिछली कुछ कड़ियाँ हम
“फेसबुक” पर अपने कुछ मित्र समूह को साझा नहीं कर पा रहे थे।
संगीत-प्रेमियों से अनुरोध है कि हमारी वेबसाइट
https://radioplaybackindia.com अथवा http://139.59.14.115/rpi/wordpress पर
क्लिक करके हमारे सभी साप्ताहिक स्तम्भों का अवलोकन करते रहें।
“स्वरगोष्ठी” पर हमारी पिछली कड़ियों के बारे में हमें अनेक पाठकों की
प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी
“स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया
हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो
तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका
कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia9@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के
इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।
प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  


रेडियो प्लेबैक इण्डिया  
वर्ष के महाविजेता – 2 : SWARGOSHTHI – 451 : MAHAVIJETA OF THE YEAR – 2 : 12 Jan. 2020 

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