Dil se Singer

राग झिंझोटी : SWARGOSHTHI – 425 : RAG JHINJHOTI






स्वरगोष्ठी – 425 में आज

खमाज थाट के राग – 6 : राग झिंझोटी

उस्ताद अब्दुल करीम खाँ से राग झिंझोटी में एक ठुमरी और मुकेश से फिल्मी गीत सुनिए


उस्ताद अब्दुल करीम खाँ
मुकेश

“रेडियो
प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी
श्रृंखला “खमाज थाट के राग” की छठी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब
संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने
वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा थाट-व्यवस्था है। भारतीय
संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात कुल 12 स्वरों का प्रयोग
होता है। एक राग की रचना के लिए उपरोक्त 12 स्वरों में से कम से कम 5
स्वरों का होना आवश्यक है। संगीत में थाट, रागों के वर्गीकरण की पद्धति है।
सप्तक के 12 स्वरों में से क्रमानुसार 7 मुख्य स्वरों के समुदाय को थाट
कहते हैं। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में 72
मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत पद्धति में 10 थाट का प्रयोग
किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ
किया था। वर्तमान समय में रागों के वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है।
भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये 10 थाट हैं- कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव,
पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी और भैरवी। इन्हीं 10 थाटों के अन्तर्गत
प्रचलित-अप्रचलित सभी रागों को सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में
थाट, स्वरों के उस समूह को कहते हैं जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता
है। पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ‘राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक
लोचन कवि ने रागों के वर्गीकरण की परम्परागत ‘ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का
परिमार्जन कर मेल अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस
समय सोलह हज़ार राग प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी
में थाटों के अन्तर्गत रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली
का उल्लेख सत्रहवीं शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक
ग्रन्थों में भी किया गया है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का
प्रयोग लगभग 300 सौ वर्षों तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम और
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे ने
भारतीय संगीत के बिखरे सूत्रों को न केवल संकलित किया बल्कि संगीत के कई
सिद्धान्तों का परिमार्जन भी किया। भातखण्डे जी द्वारा निर्धारित दस थाट
में से तीसरा थाट खमाज है। इस श्रृंखला में हम खमाज थाट के रागों पर क्रमशः
चर्चा कर रहे हैं। प्रत्येक थाट का एक आश्रय अथवा जनक राग होता है और शेष
जन्य राग कहलाते हैं। आज के अंक में खमाज थाट के जन्य राग “झिंझोटी” पर
चर्चा करेंगे। आज के अंक में हम आपको सुविख्यात संगीतज्ञ उस्ताद अब्दुल
करीम खाँ के स्वरों में प्रस्तुत राग झिंझोटी की प्रसिद्ध ठुमरी के माध्यम
से हम राग के शास्त्रीय स्वरूप का दर्शन करा रहे हैं। राग झिंझोटी के
स्वरों का फिल्मी गीतों में अधिक उपयोग किया गया है। इस राग के स्वरों पर
आधारित एक फिल्मी गीत का हमने चयन किया है। आज की कड़ी में हम आपको 1959 में
प्रदर्शित फिल्म “छोटी बहन” से शंकर जयकिशन का स्वरबद्ध किया एक गीत –
“जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल…” पार्श्वगायक मुकेश के स्वर में सुनवा रहे हैं।

आज के
अंक में हम खमाज थाट के राग झिंझोटी के बारे में चर्चा कर रहे हैं। इस राग
में प्रस्तुत की जाने वाली पारम्परिक ठुमरी- ‘पिया बिन नाहीं आवत चैन…’
के गायक उस्ताद अब्दुल करीम खाँ सम्पूर्ण भारतीय संगीत का प्रतिनिधित्व
करते थे। वे उत्तर और दक्षिण भारतीय संगीत के बीच एक सेतु थे। उन्होने
दक्षिण के कर्नाटक संगीत के कई रागों को उत्तर भारतीय संगीत में शामिल किया
और सरगम के विशिष्ट अन्दाज को उत्तर भारत में प्रचलित किया। किराना घराने
के इस महान संगीतज्ञ का जन्म उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुजफ्फरनगर जिले में
स्थित कैराना नामक कस्बे में वर्ष 1884 में हुआ था। आज जिसे हम संगीत के
किराना घराने के नाम से जानते हैं, वह इसी कस्बे के नाम पर पड़ा था। जन्म
से ही सुरीले कण्ठ के धनी अब्दुल करीम खाँ की सीखने की रफ्तार इतनी तेज थी
कि मात्र छः वर्ष की आयु में ही संगीत-सभाओं में गाने लगे थे। उनकी प्रतिभा
इतनी विलक्षण थी कि पन्द्रह वर्ष की आयु में बड़ौदा दरबार में गायक के रूप
में नियुक्त हो गए थे। वहाँ वे 1899 से 1902 तक रहे और उसके बाद मिरज चले
गए। खाँ साहब खयाल गायकी के साथ ठुमरी, दादरा, भजन और मराठी नाट्य संगीत के
गायन में भी दक्ष थे। वर्ष 1925-26 में उनकी गायी राग झिंझोटी की अत्यन्त
लोकप्रिय ठुमरी- ‘पिया बिन नाहीं आवत चैन….’ का रिकार्ड भी बना था। आइए,
उस्ताद अब्दुल करीम खाँ के स्वर में सुनते हैं, राग झिंझोटी यही प्रसिद्ध
ठुमरी।
राग झिंझोटी : ‘पिया बिन नाहीं आवत चैन….’ : उस्ताद अब्दुल करीम खाँ

राग
झिंझोटी खमाज थाट का जन्य राग माना जाता है। इस राग में निषाद स्वर कोमल
और शेष स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। कभी-कभी कोमल गान्धार स्वर का
प्रयोग भी कर लिया जाता है। आरोह और अवरोह दोनों में सात-सात स्वर प्रयोग
किये जाते हैं। इसीलिए इसकी जाति सम्पूर्ण-सम्पूर्ण होती है। वादी स्वर
गान्धार और संवादी स्वर निषाद माना गया है। वादी-संवादी में षडज-पंचम भाव
स्थापित नहीं होता, क्योंकि निषाद स्वर कोमल है। राग झिंझोटी चंचल
प्रवृत्ति का राग होता है। इसे मुख्यतः मध्य और मन्द्र सप्तकों में
गाते-बजाते हैं। इस राग को गाने-बजाने का सर्वाधिक उपयुक्त समय रात्रि का
दूसरा प्रहर होता है। आइए, अब हम आपको राग झिंझोटी पर आधारित एक फिल्मी गीत
सुनवाते हैं। यह गीत हमने 1959 में प्रदर्शित फिल्म “छोटी बहन” से लिया
है। गीत के गायक मुकेश हैं। हसरत जयपुरी के लिखे गीत को शंकर जयकिशन ने
संगीतबद्ध किया है। गीत में राग झिंझोटी के स्वर और कहरवा ताल उपस्थित है।
आप यह गीत सुनिए और हमें आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।
राग झिंझोटी : “जाऊँ कहाँ बता ऐ दिल…” : मुकेश : फिल्म – छोटी बहन

संगीत पहेली


“स्वरगोष्ठी”
के 425वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1977 में प्रदर्शित एक
फिल्म के राग आधारित गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर
आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो
प्रश्नों के सही उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा
तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते
हैं। 430वें अंक की पहेली तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें
वर्ष 2019 के तीसरे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे
वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की
घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का स्पर्श है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका की आवाज़ हैं?
आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com
पर ही शनिवार, 13 जुलाई, 2019 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि
उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली
प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर
स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम
के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के अंक संख्या 427 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में
प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या
अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी
में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।
पिछली पहेली के सही उत्तर और विजेता


‘स्वरगोष्ठी’
के 423वें अंक की पहेली में हमने आपसे वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म “देख
कबीरा रोया” के एक गीत का एक अंश सुनवा कर तीन प्रश्नों में से पूर्ण अंक
प्राप्त करने के लिए कम से कम दो प्रश्नों के सही उत्तर की अपेक्षा की थी।
पहेली के पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – तिलंग, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – कहरवा और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – लता मंगेशकर

‘स्वरगोष्ठी’ की इस पहेली का सही उत्तर देने वाले हमारे विजेता हैं; कल्याण, महाराष्ट्र से शुभा खाण्डेकर, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, चेरीहिल, न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, अहमदाबाद, गुजरात से मुकेश लाडिया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी
उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक
बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर
ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी
हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के
सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप
इसमें भाग ले सकते हैं।
अपनी बात
मित्रों,
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर श्रृंखला
“खमाज थाट के राग” की छठी कड़ी में आज आपने खमाज थाट के जन्य राग “झिंझोटी”
का परिचय प्राप्त किया। साथ ही इस राग के शास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए
सुविख्यात संगीतज्ञ उस्ताद अब्दुल करीम खाँ के स्वरों में प्रस्तुत एक
ठुमरी का रसास्वादन किया। इसके बाद इसी राग पर आधारित फिल्म “छोटी बहन” से
एक मनमोहक गीत मुकेश के स्वरों में सुनवाया। संगीतकार शंकर जयकिशन ने इस
गीत को राग झिंझोटी के स्वरों में पिरोया है। “स्वरगोष्ठी” पर हमारी पिछली
कड़ियों के बारे में हमें अनेक पाठकों की प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है।
हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का
अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और
श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी
वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो
हमें  swargoshthi@gmail.com
पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के
इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।
प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  




रेडियो प्लेबैक इण्डिया  
राग झिंझोटी : SWARGOSHTHI – 425 : RAG JHINJHOTI : 7 जुलाई, 2019

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