Dil se Singer

कल्याण थाट : SWARGOSHTHI – 403 : KALYAN THAT



स्वरगोष्ठी – 403 में आज

कल्याण थाट के राग – 1 : राग कल्याण अर्थात यमन

उस्ताद राशिद खाँ से राग कल्याण / यमन में खयाल और मोहम्मद रफी से एक फिल्मी गीत सुनिए


उस्ताद राशिद खाँ
मोहम्मद रफी

“रेडियो
प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर आज से आरम्भ
हो रही एक नई लघु श्रृंखला “कल्याण थाट के राग” के प्रथम अंक में मैं
कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ।
भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा
थाट-व्यवस्था है। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात
कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। एक राग की रचना के लिए उपरोक्त 12 स्वरों
में से कम से कम 5 स्वरों का होना आवश्यक है। संगीत में थाट रागों के
वर्गीकरण की पद्धति है। सप्तक के 12 स्वरों में से क्रमानुसार 7 मुख्य
स्वरों के समुदाय को थाट कहते हैं। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण
भारतीय संगीत पद्धति में 72 मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत
पद्धति में 10 थाट का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु
नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ किया था। वर्तमान समय में रागों के
वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है। भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये 10
थाट हैं- कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव, पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी
और भैरवी। इन्हीं 10 थाटों के अन्तर्गत प्रचलित-अप्रचलित सभी रागों को
सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में थाट स्वरों के उस समूह को कहते हैं
जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता है। पन्द्रहवीं शताब्दी के
उत्तरार्द्ध में ‘राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक लोचन कवि ने रागों के
वर्गीकरण की परम्परागत ‘ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का परिमार्जन कर मेल
अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस समय सोलह हज़ार राग
प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी में थाटों के
अन्तर्गत रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली का उल्लेख
सत्रहवीं शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक ग्रन्थों में भी
किया गया है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का प्रयोग लगभग 300
सौ वर्षों तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम और बीसवीं शताब्दी के
प्रारम्भिक दशकों में पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे ने भारतीय संगीत के
बिखरे सूत्रों को न केवल संकलित किया बल्कि संगीत के कई सिद्धान्तों का
परिमार्जन भी किया। भातखण्डे जी द्वारा निर्धारित दस थाट में से पहला थाट
कल्याण है। इस श्रृंखला में हम कल्याण थाट के दस रागों पर क्रमशः चर्चा
करेंगे। प्रत्येक थाट एक आश्रय अथवा जनक राग होता है और शेष जन्य राग
कहलाते हैं। आज के अंक में कल्याण थाट के आश्रय राग कल्याण अथवा यमन पर
चर्चा करेंगे। आपके लिए पहले सुविख्यात संगीतज्ञ उस्ताद राशिद खाँ के स्वर
में इस राग की एक बन्दिश प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके बाद इसी राग पर आधारित
एक गीत फिल्म “मृगतृष्णा” से मोहम्मद रफी की आवाज़ में प्रस्तुत कर रहे हैं।

कल्याण थाट
के स्वर होते हैं- सा, रे, ग, म॑, प ध, नि, अर्थात इस थाट में मध्यम स्वर
तीव्र होता है और शेष स्वर शुद्ध होता है। राग कल्याण अथवा यमन, कल्याण थाट
का आश्रय अथवा जनक राग माना जाता है। मध्यकालीन ग्रन्थों में इस राग का
यमन नाम से उल्लेख मिलता है। परन्तु प्राचीन ग्रन्थों में इसका नाम केवल
कल्याण ही मिलता है। आधुनिक ग्रन्थों में यमन एक सम्पूर्ण जाति का राग है।
यह कल्याण थाट का आश्रय राग होता है। आश्रय राग का अर्थ होता है, ऐसा राग,
जिसमें थाट में प्रयुक्त स्वर की उपस्थिति हो। इस थाट के आश्रय राग कल्याण
अथवा यमन में सभी सात स्वरों का प्रयोग होता है। मध्यम स्वर तीव्र और शेष
सभी छः स्वर शुद्ध प्रयोग किए जाते हैं। वादी स्वर गान्धार और संवादी निषाद
होता है। इसका गायन-वादन समय गोधूली बेला अर्थात सूर्यास्त से लेकर रात्रि
के प्रथम प्रहर तक होता है। राग कल्याण अथवा यमन के आरोह के स्वर हैं- सा,
रे, ग, म॑, प, ध, नि, सां तथा अवरोह के स्वर हैं- सां, नि, ध, प, म॑, ग,
रे, सा होते हैं। अब हम आपको राग कल्याण अथवा यमन के स्वरों में तीनताल
में निबद्ध एक खयाल रचना सुनवाते है। इसे प्रस्तुत कर रहे हैं, रामपुर
सहसवान घराने के सुविख्यात संगीतज्ञ उस्ताद राशिद खाँ।
राग कल्याण अथवा यमन : ‘ऐसों सुगढ़ सुगढ़वा बालम…’ : उस्ताद राशिद खान

इस
राग का प्राचीन नाम कल्याण ही मिलता है। मुगल काल में राग का नाम यमन
प्रचलित हुआ। वर्तमान में इसका दोनों नाम, कल्याण और यमन, प्रचलित है। यह
दोनों नाम एक ही राग के सूचक हैं, किन्तु जब हम ‘यमन कल्याण’ कहते हैं तो
यह एक अन्य राग का सूचक हो जाता है। राग यमन कल्याण, राग कल्याण अथवा यमन
से भिन्न है। इसमें दोनों मध्यम का प्रयोग होता है, जबकि यमन में केवल
तीव्र मध्यम का प्रयोग होता है। राग कल्याण अथवा यमन के चलन में अधिकतर
मन्द्र सप्तक के निषाद से आरम्भ होता है और जब तीव्र मध्यम से तार सप्तक की
ओर बढ़ते हैं तब पंचम स्वर को छोड़ देते हैं। राग कल्याण के कुछ प्रचलित
प्रकार हैं; पूरिया कल्याण, शुद्ध कल्याण, जैत कल्याण आदि। राग कल्याण
गंभीर प्रकृति का राग है। इसमे ध्रुपद, खयाल तराना तथा वाद्य संगीत पर
मसीतखानी और रजाखानी गतें प्रस्तुत की जाती हैं। अब हम राग कल्याण अथवा यमन
के स्वरों पर आधारित एक फिल्मी गीत प्रस्तुत कर रहे हैं। यह गीत हमने 1975
में प्रदर्शित फिल्म “मृगतृष्णा” से लिया है। फिल्म के संगीतकार शम्भू सेन
हैं और इस गीत को स्वर मोहम्मद रफी ने दिया है। गीत के आरम्भ में कवित्त
की पंक्तियों के स्वर सम्भवतः संगीतकार शम्भू सेन के हैं। यह गीत अभिनेत्री
हेमामालिनी के नृत्य पर फिल्माया गया है। आप राग कल्याण अथवा यमन की इस
रचना का रसास्वादन कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की
अनुमति दीजिए।
राग कल्याण अथवा यमन : “नव कल्पना नव रूप से…” : मोहम्मद रफी : फिल्म – मृगतृष्णा

संगीत पहेली


“स्वरगोष्ठी”
के 403सरे अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1964 में प्रदर्शित एक
फिल्म के रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको
दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के
सही उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों
प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
पहेली क्रमांक 410 तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष
2019 के पहले सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के
प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की
जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।

1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि यह गीत किस राग पर आधारित है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका के स्वर हैं?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com
पर ही शनिवार, 26 जनवरी, 2019 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि
उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली
प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर
स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम
के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के अंक संख्या 405 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में
प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या
अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी
में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।
पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’
क्रमांक 401 में हमने आपसे पहेली का कोई भी प्रश्न नहीं पूछा था। इसीलिए
हम इस अंक में पहेली का उत्तर और विजेताओं के नाम प्रकाशित नहीं कर रहे
हैं। पहेली क्रमांक 402 की पहेली का उत्तर और विजेताओं के नाम “स्वरगोष्ठी”
के क्रमांक 404 में हम प्रकाशित करेंगे।

अपनी बात
मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर आज
से आरम्भ हो रही श्रृंखला “कल्याण थाट के राग” का यह प्रवेशांक था।
श्रृंखला की पहली कड़ी में आपने कल्याण थाट के आश्रय अथवा जनक राग कल्याण
अथवा यमन का परिचय प्राप्त किया। इस कड़ी में आपने उस्ताद राशिद खाँ के स्वर
में कल्याण थाट के राग कल्याण अथवा यमन की एक बन्दिश का रसास्वादन किया।
दूसरे चरण में इसी राग पर आधारित फिल्म “मृगतृष्णा” का गीत मोहम्मद रफी के
स्वर में प्रस्तुत किया गया। “स्वरगोष्ठी” पर महाविजेताओं पर केन्द्रित
अंकों के बारे में हमें अनेक पाठकों की प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है। आज
हम दो महाविजेताओं की प्रतिक्रिया से आपको अवगत करा रहे हैं। पहले आप हमारी
तृतीय महाविजेता मेरिलैण्ड, अमेरिका की विजया राजकोटिया के विचार से अवगत
हों;

Vijaya Rajkotia
Thank you So much for your dedicated work on Swargoshthi. I enjoyed
watching and reading interesting information about lot of things. I will
send you a detailed email later. We are in the process of moving into
apartment so have been very busy so I will touch basis with you.
Namaskar.

और अब हम वोरहीज, न्यूजर्सी के डॉ. किरीट छाया की प्रतिक्रिया प्रस्तुत कर रहे हैं;

Dear shree Krishna Mohanji, 
Once
again I am honoured to be selected one of the Maha Vijeta for the year
2018. It is always an interesting challenge that I look forward to every
Saturday night ( For us ). Your description of each Raag is so perfect
that an amateur like me learns something each week. This year it has
prompted me to take up learning to play Harmonium. Your dedication and
your expertise along with your equally knowledgeable colleagues is
exemplary. I thank Shrimati Vijayaben for introducing me to this
wonderful blog. I take this opportunity to thank you all at Swaragoshthi
for a great job and please continue doing this. 

हमें
विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन
करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और श्रृंखला
के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा
अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com
पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के
इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।

प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  

रेडियो प्लेबैक इण्डिया
कल्याण थाट : SWARGOSHTHI – 403 : KALYAN THAT : 20 Jan, 2019
 

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दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे…. बेगम अख्तर

Amit

2 comments

Vijay Sharma January 21, 2019 at 1:45 pm

Sung by legendary Lata ji. Raga Ka mod. Teentaal.

Reply
कृष्णमोहन January 27, 2019 at 7:29 am

विजय जी, नमस्कार। आपका पहेली का उत्तर हमें समय पर मिल गया था, किन्तु उसका प्रकाशान हम उत्तर देने की अन्तिम तिथि के पहले नहीं कर सकते थे। आपसे अनुरोध है कि कृपया अपना उत्तर केवल ई-मेल से अपने पता के साथ ही भेजा करें।
सम्पादक

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