Dil se Singer

राग भैरवी और मालकौंस : SWARGOSHTHI – 371 : RAG BHAIRAVI & MALKAUNS



स्वरगोष्ठी – 371 में आज

दस थाट, बीस राग और बीस गीत – 10 : भैरवी थाट

पं. भीमसेन जोशी से राग भैरवी में खयाल और पं. राजन मिश्र से फिल्म संगीत की रचना सुनिए


पण्डित भीमसेन जोशी
पण्डित राजन मिश्र

‘रेडियो
प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी
श्रृंखला ‘दस थाट, बीस राग और बीस गीत’ की दसवीं और समापन कड़ी में मैं
कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ।
भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा
थाट व्यवस्था है। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात
कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। एक राग की रचना के लिए उपरोक्त 12 स्वरों
में से कम से कम 5 स्वरों का होना आवश्यक है। संगीत में थाट रागों के
वर्गीकरण की पद्धति है। सप्तक के 12 स्वरों में से क्रमानुसार 7 मुख्य
स्वरों के समुदाय को थाट कहते हैं। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण
भारतीय संगीत पद्धति में 72 मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत
पद्धति में 10 थाट का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु
नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ किया था। वर्तमान समय में रागों के
वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है। भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये 10
थाट हैं- कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव, पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी
और भैरवी। इन्हीं 10 थाटों के अन्तर्गत प्रचलित-अप्रचलित सभी रागों को
सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में थाट स्वरों के उस समूह को कहते हैं
जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता है। पन्द्रहवीं शताब्दी के
उत्तरार्द्ध में ‘राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक लोचन कवि ने रागों के
वर्गीकरण की परम्परागत ‘ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का परिमार्जन कर मेल
अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस समय सोलह हज़ार राग
प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी में थाटों के
अन्तर्गत रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली का उल्लेख
सत्रहवीं शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक ग्रन्थों में भी
किया गया है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का प्रचलन लगभग 300
सौ वर्षों तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी अन्तिम और बीसवीं शताब्दी के
प्रारम्भिक दशकों में पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे ने भारतीय संगीत के
बिखरे सूत्रों को न केवल संकलित किया बल्कि संगीत के कई सिद्धान्तों का
परिमार्जन भी किया। दस थाटों की आधुनिक प्रणाली का सूत्रपात भातखण्डे जी ने
ही किया था। भातखण्डे जी द्वारा निर्धारित दस थाट में से दसवाँ थाट भैरवी
है। श्रृंखला की आज की कड़ी में हम आपसे भैरवी थाट पर चर्चा करेंगे और इस
थाट के आश्रय राग भैरवी में निबद्ध पण्डित भीमसेन जोशी के स्वरों में दो
खयाल रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। साथ ही भैरवी थाट के अन्तर्गत वर्गीकृत राग
मालकौंस के स्वरों में निबद्ध एक फिल्मी गीत का उदाहरण पण्डित राजन मिश्र
की आवाज़ में प्रस्तुत करेंगे।

श्रृंखला की
पिछली नौ कड़ियों में हमने संगीत के नौ थाटों और उनके आश्रय रागों का परिचय
प्राप्त किया। आज हम ‘भैरवी’ थाट और राग के बारे में चर्चा करेंगे। परन्तु
इससे पहले आइए, थाट और राग के अन्तर को समझने का प्रयास किया जाए। दरअसल
थाट केवल ढाँचा है और राग एक व्यक्तित्व है। थाट-निर्माण के लिए सप्तक के
12 स्वरों में से कोई सात स्वर क्रमानुसार प्रयोग किया जाता है, जब कि राग
में पाँच से सात स्वर प्रयोग किए जाते हैं। साथ ही राग की रचना के लिए
आरोह, अवरोह, प्रबल, अबल आदि स्वर-नियमों का पालन किया जाता है। आज का थाट
है- ‘भैरवी’, जिसमें सा, रे॒, ग॒, म, प, ध॒, नि॒ स्वरों का प्रयोग होता है,
अर्थात ऋषभ, गान्धार, धैवत और निषाद स्वर कोमल और मध्यम स्वर शुद्ध।
‘भैरवी’ थाट का आश्रय राग भैरवी नाम से ही पहचाना जाता है। इस राग का वादी
स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। यूँ तो इसके गायन-वादन का समय
प्रातःकाल, सन्धिप्रकाश बेला में है, इसके साथ ही परम्परागत रूप से राग
‘भैरवी’ का गायन-वादन किसी संगीत-सभा अथवा समारोह के अन्त में किये जाने की
परम्परा बन गई है। राग ‘भैरवी’ को ‘सदा सुहागिन राग’ भी कहा जाता है। इस
राग में ठुमरी, दादरा, सुगम संगीत और फिल्म संगीत में राग भैरवी का
सर्वाधिक प्रयोग मिलता है। परन्तु आज आपको सुनवाने के लिए हमने राग भैरवी
में निबद्ध दो खयाल का चुनाव किया है। इन खयाल के स्वर पण्डित भीमसेन जोशी
के हैं।
राग भैरवी : विलम्बित ‘फुलवन गेंद से…’ और द्रुत खयाल- ‘हमसे पिया…’ : पं. भीमसेन जोशी

भैरवी
थाट के अन्य कुछ प्रमुख राग हैं- मालकौस, धनाश्री, विलासखानी तोड़ी, भूपाल
तोड़ी, सेनावती, हेमवर्द्धिनी आदि। राग मालकौंस, भैरवी थाट का प्रमुख राग
है। यह औडव-औडव जाति का राग है, अर्थात आरोह और अवरोह में पाँच-पाँच स्वरों
का प्रयोग किया जाता है। राग मालकौंस में ऋषभ और पंचम स्वरों का प्रयोग
नहीं होता। गान्धार, धैवत और निषाद स्वर कोमल प्रयोग किये जाते हैं। राग के
आरोह में नि, सा, , म, , नि, सां और अवरोह में सां, नि, , म, , म, ,
सा स्वर लगते हैं। राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है।
रात्रि के तीसरे प्रहर में इस राग का सौन्दर्य खूब निखर उठता है।

अब
हम आपको 1985 में प्रदर्शित संगीत-प्रधान फिल्म ‘सुर संगम’ से एक गीत
सुनवाते हैं। यह गीत राग मालकौंस के स्वरों में पिरोया गया है। इस गीत का
पार्श्वगायन पण्डित राजन मिश्र ने किया है, जबकि परदे पर समर्थ अभिनेता
गिरीश कर्नाड ने इस गीत को अभिनीत किया है। फिल्म में उन्होने सुप्रसिद्ध
शास्त्रीय गायक पण्डित शिवशंकर शास्त्री का चरित्र निभाया है। फिल्म ‘सुर
संगम’ का कथानक संजीव सोनार का लिखा हुआ था और इसके गीतकार वसन्त देव हैं।
संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ने फिल्म के लगभग सभी गीत रागों के आधार
पर ही तैयार किए थे। इन्हीं गीतों में से राग मालकौंस पर आधारित गीत अब हम
आपको सुनवाते हैं। आप तीनताल में निबद्ध यह गीत सुनिए और हमें इस अंक को और
श्रृंखला को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।
राग मालकौंस : ‘आए सुर के पंछी आए…’ : पं. राजन मिश्र : फिल्म – सुर संगम

संगीत पहेली


‘स्वरगोष्ठी’
के 371वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको एक पुरानी फिल्म से रागबद्ध
हिन्दी गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक
अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के उत्तर
देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का
उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। “स्वरगोष्ठी” के
180वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के
तीसरे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के
प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की
जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।


1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का स्पर्श है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस विख्यात गायिका के स्वर है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com
पर ही शनिवार, 2 जून, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि
उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली
प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर,
प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 373वें अंक में प्रकाशित
करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि
आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम
आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा
swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’
की 369वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको वर्ष 1954 में प्रदर्शित
फिल्म “शबाब” के एक गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से किसी दो प्रश्न के
उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – मुल्तानी, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – तीनताल और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – उस्ताद अमीर खाँ

“स्वरगोष्ठी”
की इस पहेली प्रतियोगिता में तीनों अथवा तीन में से दो प्रश्नो के सही
उत्तर देकर विजेता बने हैं; चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, पेंसिलवेनिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया, मुम्बई, महाराष्ट्र से शुभा खाण्डेकर, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, हैदराबाद से  डी. हरिणा माधवी और जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी और इसके साथ ही “स्वरगोष्ठी” की पहेली में पहली बार भाग लेकर विजेता बने है; गोरखपुर, उत्तर प्रदेश से डॉ. पूर्ण प्रकाश पाण्डेय
सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल
से ही भेजा करें। उपरोक्त सभी सात प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक
इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये
प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के
तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक उत्तर भी
ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।

अपनी बात

मित्रों,
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर हमारी
श्रृंखला “दस थाट, बीस राग और बीस गीत” की दसवीं और समापन कड़ी में आपने
भैरवी थाट का परिचय प्राप्त किया और इस थाट के आश्रय राग भैरवी में निबद्ध
दो खयाल सुविख्यात गायक पण्डित भीमसेन जोशी के स्वर में रसास्वादन किया।
इसके साथ ही भैरवी थाट के जन्य राग मालकौंस पर आधारित फिल्म “सुर संगम” का
एक फिल्मी गीत पण्डित राजन मिश्र के स्वर में सुना। हमें विश्वास है कि
हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और
अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक के बारे में यदि आपको कुछ
कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी अगली श्रृंखला में आपको विभिन्न रागों
से रोगों के उपचार का तरीका बताया जाएगा। हमारी नई श्रृंखला अथवा आगामी
श्रृंखलाओं के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें
swargoshthi@gmail.com
पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के
इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे। 

प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
राग भैरवी और मालकौंस : SWARGOSHTHI – 371 : RAG BHAIRAVI & MALKAUNS : 27 मई, 2018

Related posts

सुर संगम में आज – गुरूदेव रबिंद्रनाथ ठाकुर और रबिंद्रसंगीत

Sajeev

रंग ठुमरी के : SWARGOSHTHI – 210 : THUMARI

कृष्णमोहन

सुनो कहानी: गरजपाल की चिट्ठी – अनुराग शर्मा

Amit

Leave a Comment