Dil se Singer

राग जयन्त मल्हार : SWARGOSHTHI – 331 : RAG JAYANT MALHAR



स्वरगोष्ठी – 331 में आज

पावस ऋतु के राग – 6 : राग जयन्त मल्हार

पण्डित विनायक राव पटवर्धन और आशा भोसले से राग जयन्त मल्हार की रचनाएँ सुनिए


विनायक राव  पटवर्धन
आशा भोसले

‘रेडियो
प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी
श्रृंखला – “पावस ऋतु के राग” की छठी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र अपनी
सहयोगी संज्ञा टण्डन के साथ आप सभी संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता
हूँ। इस श्रृंखला में हम एक नया प्रयोग कर रहे हैं। गीतों का परिचयात्मक
आलेख हम अपने सम्पादक-मण्डल की सदस्य संज्ञा टण्डन की रिकार्ड किये आवाज़
में प्रस्तुत कर रहे हैं। आपको हमारा यह प्रयोग कैसा लगा, अवश्य सूचित
कीजिएगा। आपको स्वरों के माध्यम से बादलों की उमड़-घुमड़, बिजली की कड़क और
रिमझिम फुहारों में भींगने के लिए आमंत्रित करता हूँ। यह श्रृंखला, वर्षा
ऋतु के रस और गन्ध से पगे गीत-संगीत पर केन्द्रित है। इस श्रृंखला के
अन्तर्गत हम आपसे वर्षा ऋतु में गाये-बजाए जाने वाले रागों और उनमें निबद्ध
कुछ चुनी हुई रचनाओं पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सम्बन्धित राग के आधार
पर रचे गए फिल्मी गीत भी प्रस्तुत करेंगे। भारतीय संगीत के अन्तर्गत मल्हार
अंग के सभी राग पावस ऋतु के परिवेश की सार्थक अनुभूति कराने में समर्थ
हैं। आम तौर पर इन रागों का गायन-वादन वर्षा ऋतु में अधिक किया जाता है।
इसके साथ ही कुछ ऐसे सार्वकालिक राग भी हैं जो स्वतंत्र रूप से अथवा मल्हार
अंग के मेल से भी वर्षा ऋतु के अनुकूल परिवेश रचने में सक्षम होते हैं। इस
श्रृंखला की छठी कड़ी में हम मल्हार अंग के राग जयन्त मल्हार पर चर्चा
करेंगे। यह राग जयजयवन्ती और मल्हार अंग के मेल से बनता है। वैसे राग
जयजयवन्ती स्वतंत्र रूप से भी वर्षा ऋतु के परिवेश को रचने में समर्थ है।
परन्तु जब राग जयजयवन्ती के साथ मल्हार अंग का मेल हो जाता है तब इस राग से
अनुभूति और अधिक मुखर हो जाती है। आज हम आपको राग जयन्त मल्हार पर आधारित
एक मोहक फिल्मी गीत सुनवा रहे हैं। गायिका आशा भोसले की आवाज़ में यह गीत
1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘शक’ से लिया गया है। इसके साथ ही राग जयन्त
मल्हार का शास्त्रीय स्वरूप उपस्थित करने के लिए सुप्रसिद्ध गायक और शिक्षक
पण्डित विनायक राव पटवर्धन के स्वर में एक खयाल रचना प्रस्तुत कर रहे हैं।


राग जयन्त मल्हार : ‘मेहा बरसने लगा है आज…’ : आशा भोसले : फिल्म – शक
राग जयन्त मल्हार : ‘ऋतु आई सावन की…’ : पण्डित विनायक राव पटवर्धन


संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’
के 331वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्षा ऋतु में प्रचलित एक
विशेष गायन शैली के लोकप्रिय गीत का एक अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश
को सुन कर आपको निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देने
हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 340वें अंक की पहेली के सम्पन्न होने के बाद जिस
प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस वर्ष के चौथे सत्र का विजेता
घोषित किया जाएगा।


1 – गीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह वर्षा-ऋतु में गायी जाने वाली कौन सी संगीत शैली है?

2 – गीत में प्रयोग किये गए ताल का नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस सुविख्यात गायिका की आवाज़ है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार 26 अगस्त, 2017 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। COMMENTS
में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर
देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर,
प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 333वें अंक में
प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के
बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना
चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे
दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’
की 329वीं कड़ी की पहेली में हमने आपको 1979 में प्रदर्शित फिल्म “मीरा” से
राग आधारित गीत का एक अंश प्रस्तुत कर आपसे तीन में से दो प्रश्नों का
उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है, राग – मीरा मल्हार, दूसरे
प्रश्न का सही उत्तर है, ताल – कहरवा / तीनताल और तीसरे प्रश्न का सही
उत्तर है, स्वर – वाणी जयराम

इस
अंक की पहेली प्रतियोगिता में हमारी एक नई प्रतिभागी, लखनऊ से मीरा पन्त,
भी विजेता हैं। हम उनका हार्दिक स्वागत करता हैं। पहेली के प्रश्नों के सही
उत्तर देने वाले हमारे अन्य नियमित प्रतिभागी हैं – चेरीहिल न्यूजर्सी से
प्रफुल्ल पटेल, पेंसिलवेनिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर,
मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। आशा है कि
हमारे अन्य पाठक / श्रोता भी नियमित रूप से साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’
का अवलोकन करते रहेंगे और पहेली में भाग लेंगे। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों
को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।

अपनी बात
मित्रों,
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर हमारी
श्रृंखला “पावस ऋतु के राग” जारी है। इस श्रृंखला में ऋतु प्रधान गीतो को
प्रस्तुत किया जा रहा है। आज की इस कड़ी में हमने आपके लिए राग जयन्त मल्हार
पर चर्चा की। आगामी अंक में हम वर्षा ऋतु में गायी जाने वाली एक विशेष
संगीत शैली पर चर्चा करेंगे और इस संगीत शैली में निबद्ध कुछ रचनाएँ भी
प्रस्तुत करेंगे। हमारी जारी श्रृंखला और आगामी श्रृंखलाओं के लिए विषय,
राग, रचना और कलाकार के बारे में यदि आपकी कोई फरमाइश हो तो हमें
swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 8 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।

वाचक स्वर : संज्ञा टण्डन   
आलेख व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   




रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

Related posts

प्लेबैक इंडिया वाणी (6) कॉकटेल, अहा ज़िंदगी और आपकी बात

Amit

काव्यनाद की AIR FM Rainbow पर घंटे भर हुई चर्चा

Amit

१ मई- आज का गाना

Amit

2 comments

Bharti August 20, 2017 at 9:11 am

Liked very much

Reply
pcpatnaik August 22, 2017 at 5:57 am

Achha Tha.. Sangyaji.

Reply

Leave a Comment