Dil se Singer

लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम ऑडियो कथा


लोकप्रिय स्तम्भ “बोलती कहानियाँ” के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में स’आदत हसन मंटो की कथा “कुत्ते की दुआ” का पाठ सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रसिद्ध साहित्यकार और भारतीय सैनिक अधिकारी कर्नल गौतम राजऋषि की कथा लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम, स्पेन से पूजा अनिल के स्वर में।


रेडियो प्लेबैक इंडिया की ओर से गौतम जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें

राष्ट्रीय पहचान वाली पत्रिका हंस में प्रकाशित हो चुकी इस कहानी लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम का गद्य पाल ले इक रोग नादां पर उपलब्ध है। कुल प्रसारण समय 19 मिनट 20 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


हवा जब किसी की कहानी कहे है
नये मौसमों की जुबानी कहे है
फ़साना लहर का जुड़ा है ज़मीं से
समुन्दर मगर आसमानी कहे है
~ गौतम राजऋषि


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी


“नहीं, गणित में कभी कमजोर नहीं रहा वो। लेकिन इस दिनों, महीनों और सालों के हिसाब से अभी फिलहाल बचना चाहता था।”
 (कर्नल गौतम राजऋषि की कथा “लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम” से एक अंश)


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लेम्बरेटा, नन्हीं परी और एक ठिठकी शाम MP3


#Eighth Story, Lambretta, Nanhi Pari aur Ek Thithaki Shaam: Gautam Rajrishi/Hindi Audio Book/2016/8. Voice: Pooja Anil

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तू हुस्न है मैं इश्क हूँ, तू मुझमें है मैं तुझमें हूँ….साहिर, रवि, आशा और महेंद्र कपूर वाह क्या टीम है

Sajeev

3 comments

गौतम राजऋषि March 16, 2016 at 6:51 am

आभार अनुराग जी और पूजा मैम …. मेरी इतनी तारीफ के लिए जिनमें कितना मैं डिजर्व करता हूँ ये नहीं मालूम मुझे | कहानी को नया अंदाज़ देने के लिए मैम को बड़ा सा शुक्रिया !!

Reply
वन्दना अवस्थी दुबे March 16, 2016 at 11:16 am

आहा…आनंदम।

Reply
sourabh sharma April 24, 2016 at 6:57 am

मेरे पास जज्बात नहीं है कहानी की सुंदरता बयां करने के लिए…. ऐसी ही एक नन्ही परी को किसी ने रोका था कुछ सालों पहले, वो किस्सा कभी भूला नहीं। पूजा जी और अनुराग सर को भी इस कहानी को मुकम्मल बनाने का श्रेय जाता है। गौतम जी की अगली कहानियों का भी इंतजार रहेगा।

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