Dil se Singer

“छू कर मेरे मन को…”, क्यों राजेश रोशन को अपने पैसे से इस गीत को रेकॉर्ड करना पड़ा?


एक गीत सौ कहानियाँ – 59

 
छू कर मेरे मन को…’ 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह स्तम्भ ‘एक गीत सौ कहानियाँ’। इसकी 59-वीं कड़ी में आज जानिये फ़िल्म ’याराना’ के मशहूर गीत “छू कर मेरे मन को, किया तूने क्या इशारा…” के बारे में जिसे किशोर कुमार ने गाया था। 


रबीन्द्र संगीत की धुनों पर आधारित
हिन्दी फ़िल्मी गीतों की परम्परा बहुत पुरानी है। 30 के दशक से ही संगीतकार,
ख़ास कर बंगाली संगीतकार, रबीन्द्र संगीत से प्ररणा लेकर फ़िल्मी गीत रचते
रहे हैं। पंकज मल्लिक, कमल दासगुप्ता, अनिल बिस्वास, सचिन देव बर्मन,
हेमन्त कुमार से लेकर बप्पी लाहिड़ी तक यह परम्परा जारी रही है। ये सभी
बंगाली संगीतकारों के नाम हमने गिनाए। एक और संगीतकार हैं जिन्हें 100%
बंगाली तो नहीं कह सकते, पर हाँ 50% ज़रूर बंगाली हैं। राजेश रोशन वह नाम
है, उनकी माँ इरा रोशन बंगाली थीं और इस तरह से बंगाल के सुरीले संगीत की
धारा उनके नसों में भी बही है। राजेश रोशन ने भी कई बार रबीन्द्र संगीत को
आधार बना कर फ़िल्मी गीत रचे हैं। इनमें से सबसे प्रमुख गीत रहा है 1981 की
फ़िल्म ’याराना’ का, “छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा…” जो आधारित
है “तोमार होलो शुरू, आमा होलो शारा” पर। निस्सन्देह यह गीत बेहद कामयाब
रहा और आज भी अक्सर रेडियो पर सुनाई दे जाता है, पर राजेश रोशन से एक बड़ी
भूल हो गई थी। दरअसल बात ऐसी थी कि रबीन्द्र संगीत का अधिकार शान्तिनिकेतन
के विश्वभारती विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित थी, जिसका अर्थ यह है कि किसी
भी कलाकार को रबीन्द्र संगीत का इस्तेमाल करने के लिए विश्वभारती से
अनुमति लेनी पड़ती थी। पर प्रस्तुत गीत के लिए ना राजेश रोशन ने अनुमति ली
और ना ही ’याराना’ फ़िल्म के निर्माता ने। नतीजा यह हुआ कि फ़िल्म के रिलीज़
होने तक किसी को भनक तक नहीं पड़ी कि ऐसा कोई गीत बन रहा है। जैसे ही फ़िल्म
रिलीज़ हुई और कलकत्ता के थिएटर में लोग इसे देखने पहुँचे, इस गीत को सुनते
ही लोग भड़क उठे। बंगाल में कविगुरू की क्या अहमियत और सम्मान है यह हम सभी
जानते हैं। कविगुरु की धुन का बिना अनुमति के हिन्दी फ़िल्मी गीत में सुनाई
दे जाना बंगाल के लोगों को अच्छा नहीं लगा, और इसका विरोध प्रदर्शन हुआ। कई
सिनेमाघरों में तोड़-फोड़ भे हुए जिससे फ़िल्म को थिएटरों से उतारना पड़ा।
मामला ज़रूरत से ज़्यादा बिगड़ता देख ’याराना’ फ़िल्म के निर्माता और राजेश
रोशन ने माफ़ी माँगी और विश्वभारती को क्षमा याचना का पत्र भेज कर विवाद को
ख़त्म किया। राजेश रोशन के हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि इतना सब कुछ हो जाने
के बाद भी बिल्कुल इसी धुन और मीटर का इस्तेमाल कर कुछ वर्षों बाद (1986
में) एक और गीत बनाया फ़िल्म ’मक्कार’ के लिए। किशोर कुमार की ही आवाज़ में
यह गीत था “तू ही मेरा सपना, तू ही मेरी मंज़िल”। 1998 में फ़िल्म ’युगपुरुष’
फ़िल्म में एक बार राजेश रोशन ने रबीन्द्र संगीत “पागला हावा बादोल दिने”
पर आधारित गीत बनाया “बंधन खुला पंछी उड़ा”।


यह
तो थी “छू कर मेरे मन को” के संगीत की दास्तान। अब आते हैं इसके बोलों पर।
गीतकार अंजान के बेटे समीर उस समय अपने पिता के साथ मौजूद थे जब यह गीत
लिखा जा रहा था। विविध भारती के एक साक्षात्कार में समीर ने इस गीत के बारे
में कुछ ऐसा बताया था – “छूकर मेरे मन को…”, अब देखिए इस गाने के पीछे
भी एक बड़ी अजीब सी कहानी है, और मुझे याद है, मैं और पापा गाँव जा रहे थे;
तो उनकी कैसेट पे दो गानों की ट्यून, एक तो उस फ़िल्म का टाइटल गाना “तेरे
जैसा यार कहाँ…” और यह दूसरा गाना। टाइटल गाना तो उन्होंने रास्ते में ही
कम्प्लीट कर लिया था पर यह गाना, उनको लग रहा था कि बहुत अच्छा ट्यून राजू
ने दिया है, मैं कुछ अच्छा करना चाह रह हूँ। और उन्होंने मुखड़ा मुझे
सुनाया “छू कर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा”, मुझे लगा कि बहुत ख़ूबसूरत
गाना बनेगा। मगर जब हम गाँव से आए और सिटिंग् हुई और रेकॉर्डिंग् पर जब
गाना पहुँचा तो संजोग की बात थी कि रेकॉर्डिंग् में जाने से पहले तक
प्रोड्युसर ने वह गाना नहीं सुना था। और रेकॉर्डिंग में जब प्रोड्युसर आया
और उन्होंने जैसे ही गाना सुना तो बोले कि रेकॉर्डिंग् कैन्सल करो, मुझे यह
गाना रेकॉर्ड नहीं करना है। उन्होंने कहा कि इतना बेकार गाना मैंने अपनी
ज़िन्दगी में नहीं सुना, इतना ख़राब गाना राजू तुमने हमारी फ़िल्म के लिए
बनाया है, मुझे यह गाना रेकॉर्ड नहीं करना है। अब राजेश रोशन का दिमाग़ उस
ज़माने में, उनको ग़ुस्सा बहुत आता था, उन्होंने कहा कि गफ़्फ़ार भाई, उनका नाम
था गफ़्फार नडियाडवाला, सोरज नडियाडवाला, हमीद नडियाडवाला, हमीद उसके
प्रोड्युसर थे, हमीद यह फ़िल्म बना रहे थे, यह गाना रहे ना रहे, लेकिन यह
गान मैं रेकॉर्ड करने जा रहा हूँ और तुम अभी इसी वक़्त इस रेकॉर्डिंग्
स्टुडियो से निकल जाओ, मुझे तुम्हारी शकल नहीं देखनी है, तुमको यह गाना
नहीं समझ में आएगा, मैं यह गाना रेकॉर्ड करूँगा, तुमको इसका पैसा भी नहीं
देना है, मैं अपने पैसे से रेकॉर्ड करूँगा। और उस आदमी ने अपने पैसे से वह
गाना रेकॉर्ड किया और गाना रेकॉर्ड होकर जब अमिताभ बच्चन तक पहुँचा तो
उन्होंने यह बात कही कि अगर यह गाना नहीं होगा फ़िल्म में तो मैं यह फ़िल्म
नहीं करूँगा। और वह गाना माइलस्टोन बना।” लीजिए, अब आप भी यह गाना सुन
लीजिए।

फिल्म याराना : ‘छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा…’ : किशोर कुमार : राजेश रोशन

अब
आप भी ‘एक गीत सौ कहानियाँ’ स्तंभ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी
किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो
आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप
जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख
के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें
ईमेल भेजें cine.paheli@yahoo.com के पते पर। 




खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 




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1 comment

Anita May 16, 2015 at 5:03 am

बहुत रोचक जानकारी..

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