Dil se Singer

आशा गुप्ता आशु लिखित लघुकथा ममता की छांव में

लोकप्रिय स्तम्भ “बोलती कहानियाँ” के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में शाहिद मंसूर “अजनबी” की लघुकथा माँ तो सबकी एक-जैसी होती है का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं आशा गुप्ता आशु लिखित लघुकथा ममता की छांव में, जिसे स्वर दिया है माधवी गणपुले ने।

इस कहानी मुक्ति का कुल प्रसारण समय 4 मिनट 20 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। इसका गद्य लेखिका के फेसबुक पृष्ठ पर उपलब्ध है।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


माना कि अभी नहीं जागे मेरे सोये हुये नसीब!
पर एक दिन अपना होगा खुशियां होंगी करीब !!

 ~ आशा गुप्ता “आशु”


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


“मुझे उस दिन का इन्तजार था जब बच्चों के पंख ताकतवर हो जाते और वो परवाज़ भरते।”
 (आशा गुप्ता “आशु” की लघुकथा “ममता की छांव में” से एक अंश)


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मुक्ति MP3


#Eighth Story, Mamta Ki Chhaon Mein; Asha Gupta Ashu; Hindi Audio Book/2015/08. Voice: Madhavi Ganpule

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Amit

3 comments

Unknown May 20, 2015 at 5:36 am

आपने कहानी लिखी है,मैने इस सच को जीया है,अपनी ही बालकनी में,वो बुलबुल का घोंसला और उसके बच़चे.डर से मैं पंखा नहीं चलाता था कि कहीं चोट न लग जाए या कहीं वे मर..नहीं नहीं.फिर एक दिन उनके माँ बाप देर रात तक नहीं पहुँचे,मन में अनहोनी की आशंका..खैर दुसरे दिन वो नजर आ गए.फिर एक दिन एक बच़चा मेरी पांचवी मंजिल से उड़ने की कोशिश में नीचे जमीन पर गिर गया,संयोग मैं घर पर था.मन में फिर डर कहीं बच़चे को कुछ हुआ तो नही् दौड़ कर नीचे गया,भगवान का शुकरिया बच़चा डरा हुआ पर ठीक था.मैने उसे वापस घोंसले में लाकर रख दिया.2 दिन बाद सच में उनके पंख मजबूत हो गए थे और एक दिन वो फुरर उड़ चले मन खुशी से झूम उठा.

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ashugasha24 October 6, 2015 at 2:11 pm

सूर्यांश प्रिया जी बहुत शुक्रिया आपका… यह कहानी मेरी अपनी भोगी हुई ही है आपकी तरह…… वाकई नन्हें पक्षियों की पीड़ा कितना मन को झकझोर देती है…. पीड़ा शायद सबकी एक सी ही होती है

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ashugasha24 October 6, 2015 at 2:09 pm

This comment has been removed by the author.

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