Dil se Singer

"बटाटा वड़ा…ये समुन्दर…संगीत…तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है…"

आवाज़ पर आज दिन है – Music video of the month का, हमारी टीम आपके लिए चुन कर लाएगी -एक गीत जो सुनने में तो कर्णप्रिय हो ही, साथ ही उसका विडियो भी एक शानदार प्रस्तुति हो, यानि कि ऐसा गीत जो पांचों इन्द्रियों को संतृप्त करें, हमारी टीम की पसंद आपको किस हद तक पसंद आएगी, ये तो आपकी टिप्पणियां ही हमें बतायेंगीं.

आज हम जिस गीत का विडियो लेकर उपस्थित हैं, वो गीत है फ़िल्म “सत्या” का, सत्या को राम गोपाल वर्मा, एक Hard Core Realistic फ़िल्म बनाना चाहते थे, तो जाहिर है, गीत संगीत के लिए, उसमें कोई स्थान नही था, पर जब फ़िल्म बन कर तैयार हुई, तो निर्माता जिद करने लेगे फ़िल्म में गीत डाले जायें ताकि फ़िल्म की लम्बाई बढ़े और Audio प्रचार भी मिल सके, अन्तता रामू जी को अपनी जिद छोडनी पड़ी, उन दिनों माचिस के गीतों से हिट हुई जोड़ी, विशाल भारद्वाज और गुलज़ार, को चुना गया इस काम के लिए, पटकथा में परिस्थियाँ निकाली गयीं और आनन फानन में ५ गीत रिकॉर्ड हुए और फिल्माए गए, फ़िल्म बेहद कामियाब रही, और संगीत ने लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई, “सपने में मिलती है” और “गोली मार भेजे में” आदि गीत अधिक चले, पर आज आपके लिए, जो गीत हम चुन कर लाये हैं इस फ़िल्म का, वो कुछ ख़ास है, इसकी हर बात निराली है, हालाँकि बहुत अधिक मशहूर नही हुआ, पर गुलज़ार साब के बेहतरीन गीतों में से एक है – यह गीत. इसमें इनकी विशिष्ट शैली खूब जम कर झलकती है, बानगी देखिये –

बादलों से काट काट कर,
कागजों पे नाम जोड़ना,
डोरियों से बाँध बाँध कर,
रात भर चाँद तोड़ना, और…
जामुनों की नर्म डाल पर,
नाखूनों से नाम खोदना…..

विशाल का संगीत, गीत को मूड को पूरी तरह से स्थापित करता है, Guitar का पीस सुनने लायक है, इस गीत से लंबे अरसे बाद Playback Singing में वापसी की, गायक भूपेंद्र ने, गुलज़ार के कोमल शब्दों को बहुत सलीके से अपनी रेशमी आवाज़ में उतारते रहें हैं भूपेंद्र, हमेशा से,और यह गीत भी अपवाद नही रहा इस मामले में.

अब बात करें चित्रांकन की. तो इसमे कोई शक नहीं कि इस मुलायम से गीत को बेहद उन्दा तरीके से परदे पर उतरा है, निर्देशक ने.

नायक एक Angry Young Man है जो मुंबई शहर में ख़ुद को बहुत सहज महसूस करता है, वह चुप चुप रहता है ख़ुद में दबा दबा, संवेदनाएं मर चुकी हैं, और कंक्रीट के शहर में तो बस जीते जाना भी जैसे, एक उपलब्धि है, मगर जब वो नायिका को देखता है तो उसे लगता है, कि वो किसी और ही दुनिया की है,और उसे दिखता है- गुनगुनाता एक आबशार.

गाने के बीच में कुछ संवाद भी है –

नायक – “तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है,…बटाटा वड़ा, ये समुन्दर, संगीत, ये सब….”

नायिका – “हाँ… मगर यही तो जिन्दगी है…”

नायक – “मुझे पहली बार महसूस हो रहा है”

इस छोटे से संवाद में महानगरीय जीवन की तमाम पीडा झलकती है, जहाँ हर खुशी है दामन में, बस जीने के लिए वक्त नही है…लगभग पूरा गीत Outdoor Shoot हुआ है, और पार्श्व में दिख रहा मुंबई महानगर भी एक किरदार बन कर उभर कर आता है, यूँ तो दोनों कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है, पर उर्मिला मातोंडकर अपनी नैसर्गिग सुन्दरता और उत्कृष्ट अभिनय से पूरे गीत पर छायी हुई लगती है, कैमरा के सुंदर प्रयोग ने. हर फ्रेम में जैसे जान डाल दी है.

आप भी देखिये और सुनिए ये लाजावाब गीत, और अपनी राय से हमें अवगत कराएँ –

Series – Music Video of the Month Episode 1
Song – Badalon Se…
Album/ Film – Satya
Lyrics – Gulzaar
Music – Vishal Bhardwaj
Singer – Bhupendra
Director – Ram Gopal Verma
Artists – Chakraborthy, Urmila Matondkar, and Mumbai City

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5 comments

Advocate Rashmi Saurana July 17, 2008 at 9:05 am

sundar geet. sunane ke liye aabhar.

Reply
तपन शर्मा July 17, 2008 at 7:08 pm

नायक – "तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है,…बटाटा वड़ा, ये समुन्दर, संगीत, ये सब…."
नायिका – "हाँ… मगर यही तो जिन्दगी है…"
नायक – "मुझे पहली बार महसूस हो रहा है"

सच में इस संवाद में बहुत पीड़ा है…
ये गाना मैंने कभी नहीं सुना था… वही बात जो पहले कही थी..
ऐसे गाने मीडिया में आ ही नहीं पाते हैं, न ही लोगों तक पहुँच पाते हैं..
’आवाज़’ का धन्यवाद जो सब तक ये गीत पहुँचवाया.. आगे भी ऐसे गीत सुनने को मिलेंगे, यही आशा है…

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महाशक्ति July 18, 2008 at 4:11 am

बहुत सुन्‍दर गीत है

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विश्व दीपक July 18, 2008 at 5:33 am

जैसा सुंदर गीत और संगीत है ,जैसा सुंदर इसका प्रस्तुतिकरण है , वैसा हीं सुंदर एवं मनोरम इसका वर्णन है।

सजीव जी को बहुत बहुत धन्यवाद एवं बधाईयाँ।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

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शैलेश भारतवासी July 19, 2008 at 12:29 pm

सजीव जी,

इस गीत को मैंने पहले भी कई बार सुना है। लेकिन आपका प्रस्तुतिकरण बहुत लाजवाब लगा। इसे जो भी पढ़ेगा जो बिना सुने, बिना देखे नहीं रह पायेगा।

अच्छा स्तम्भ जोड़ा है आपने 'आवाज़' में

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